Hadees in hindi

Thursday, May 30, 2019

1 كتاب السنة सुन्नत की अहमियत और फ़ज़ीलत

بَابُ اتِّبَاعِ سُنَّةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

बाब 1 :- सुन्नते रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पैरवी का बयान


١) حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، قَالَ: حَدَّثَنَا شَرِيكٌ، عَنِ الْأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: مَا أَمَرْتُكُمْ بِهِ فَخُذُوهُ، وَمَا نَهَيْتُكُمْ عَنْهُ فَانْتَهُوا

1) हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "जिस काम का मैं तुम्हें हुक्म दूं, उस पर अमल करो और जिससे मना करूं उससे रुक जाओ l"

तख़रीज : - मुसनद अहमद (8664)

तहकीम : - हाफिज़ ज़ुबैर अली ज़ई :- सहीह
                  शेख अलबानी :- सहीह 
                  शोएब अरनौत :- सहीह

1 كِتَابُ الطَّهَارَةِ तहारत के अहकाम ओ मसाइल

تَأْوِيلُ قَوْلِهِ عَزَّ وَجَلَّ: {إِذَا قُمْتُمْ إِلَى الصَّلَاةِ فَاغْسِلُوا وُجُوهَكُمْ وَأَيْدِيَكُمْ إِلَى الْمَرَافِقِ} المائدة: 6

बाब 1 :- अल्लाह तआला के फ़रमान : "जब तुम नमाज़ के लिए उठो तो अपने चेहरे और अपने हाथों को कोहनियों तक धोओ" की तफ़सीर


١) أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ قَالَ: حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ الزُّهْرِيِّ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُمَّ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: إِذَا اسْتَيْقَظَ أَحَدُكُمْ مِنْ نَوْمِهِ، فَلَا يَغْمِسْ يَدَهُ فِي وَضُوئِهِ حَتَّى يَغْسِلَهَا ثَلَاثًا، فَإِنَّ أَحَدَكُمْ لَا يَدْرِي أَيْنَ بَاتَتْ يَدُهُ

1) हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया : "जब तुम में से कोई नींद से जागे तो अपना हाथ वुज़ू के पानी में न डाले जब तक उसे तीन बार धो न ले क्यूंकि तुममें से कोई नहीं जानता कि उसके हाथ ने रात कहाँ गुज़ारी है (रात भर कहाँ कहाँ लगता रहा है)l"

तख़रीज :- मुस्लिम (643), इब्ने माजा (393), बुख़ारी (162), अबू दावूद (103)

सुरह नास (Surah Naas)


سورة الناس
بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ
“अल्लाह के नाम से जो बेहद रहम वाला, निहायत मेहरबान है l”

قُلْ اَعُوْذُ بِرَبِّ النَّاسِۙ۝۱مَلِكِ النَّاسِۙ۝۲اِلٰهِ النَّاسِۙ۝۳مِنْ شَرِّ الْوَسْوَاسِ ۙ۬ الْخَنَّاسِ۪ۙ۝۴ الَّذِیْ یُوَسْوِسُ فِیْ صُدُوْرِ النَّاسِۙ۝۵مِنَ الْجِنَّةِ وَ النَّاسِ۠۝۶
 “तू कह मैं पनाह पकड़ता हूँ लोगो के रब की l लोगों के बादशाह की l लोगो के माबूद की l वसवसा डालने वाले के शर से जो, हट हट कर आने वाला है l वो जो लोगों के सीनों में वसवसा डालता है l जिन्नों और इंसानों में से l”
अल्लाह तआला ने फ़रमाया, ऐ मेरे नबी! आप कह दीजिये कि मैं लोगो के रब की जनाब में लोगो के हक़ीक़ी बादशाह की जनाब में, लोगों के अकेले माबूद की जनाब में पनाह लेता हूँ लोगो के सीनों में वस्वसा पैदा करने शैतान के शर से l उस शैतान की सिफ़त यह है कि आदमी जब अपने रब की याद से गाफ़िल होता है तो वो उसके दिल में वस्वसा पैदा करता है और जब गफ़लत से चौकन्ना होता है और अपने रब को याद करता है तो वो शैतान फ़ौरन पीछे हट जाता है और छुप जाता है l वो शैतान जिन्नों में से भी होता है और इंसानों में से भी l इरशाद फ़रमाया :
وَ اِمَّا یَنْزَغَنَّكَ مِنَ الشَّیْطٰنِ نَزْغٌ فَاسْتَعِذْ بِاللّٰهِ ؕ اِنَّهٗ سَمِیْعٌ عَلِیْمٌ 
“और अगर कभी शैतान की तरफ़ से कोई उकसाहट तुझे उभार ही दे तो अल्लाह की पनाह तलब कर, बेशक वो सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है l” [आराफ़ : 200]
مِنْ شَرِّ الْوَسْوَاسِ ۙ۬ الْخَنَّاسِ : सय्यदना अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया : “जब नमाज़ के लिए आज़ान होती है तो शैतान गौज़ (हवा ख़ारिज करते हुए) मारता हुआ तेज़ी के साथ पीठ मोड़ कर दूर भाग जाता है, ताकि वो आज़ान की आवाज़ न सुन सके और जब आज़ान मुकम्मल हो जाती है तो वापस आ जाता है, लेकिन जब नमाज़ के लिए इक़ामत होती है, तो वो फ़िर पीठ मोड़ कर भाग जाता है l जब इक़ामत मुकम्मल होती है तो वापस आकर आदमी के दिल में ख़यालात डालना शुरू कर देता है l कहता है कि फ़ला चीज़ याद कर, फ़ला चीज़ याद कर, वो चीज़ें जो उसे याद नहीं थीं, यहाँ तक कि आदमी की हालत यह हो जाती है कि उसे यह भी मालूम नहीं होता कि उसने कितनी नमाज़ पढ़ी?” [बुख़ारी : 608]
सय्यदना अली बिन हुसैन रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं कि उम्मुल मोमिनीन सय्यदह साफिया रज़ियल्लाहू अन्हा ने उनको ख़बर दी कि वो रमज़ान के आख़िरी अशरे में जब रसूले करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एतिकाफ़ में बैठे हुए थे, आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिलने मस्जिद में आयीं, थोड़ी देर तक बातें कीं, फ़िर वापस होने के लिए खड़ी हुयीं तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम भी उनके साथ खड़े हुए, जब मस्जिद के दरवाज़े के क़रीब पहुंचे, जहाँ उम्मुल मोमिनीन उम्मे सलमा रज़ियल्लाहू अन्हा का दरवाज़ा था, तो वहां दो अंसारी सहाबी मिले l उन्होंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को सलाम किया और तेज़ी से आगे गुज़र गए, आपने फ़रमाया : “ज़रा ठहर जाओ, यह (मेरी बीवी) सफ़िया बिन्ते हुयय हैं l” वो कहने लगे, सुबहानल्लाह ! या रसूलुल्लाह ! आपका यह फ़रमाना उन पर भारी गुज़रा l आपने फ़रमाया : “शैतान आदमी के जिस्म में ख़ून की तरह दौड़ता रहता है, मैं डरा कि कहीं तुम्हारे दिन में कोई वस्वसा न डाल दे l” [बुख़ारी : 2035, मुस्लिम : 5679]
सय्यदना जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “इब्लीस अपना तख़्त पानी पर रखता है, फ़िर अपनी फ़ौज का एक हिस्सा रवाना करता है, तो उनमें से मर्तबे के लिहाज़ से उसके सबसे ज़्यादा क़रीब वो होता है जो उनमें से सबसे बड़ा फ़ितना फैलता है l उनमें से एक आता है और कहता है, मैंने यह किया वो किया l इब्लीस कहता है, तूने कुछ नहीं कियाl फ़िर उनमें से कोई आता है और कहता है, मैंने आदमी को उस वक़्त तक नहीं छोड़ा जब तक कि उसके और उसकी बीवी के बीच जुदाई न करा दी, तो इब्लीस उसको अपने क़रीब करता है, उसे गले से लगाता है और कहता है, हाँ तूने (वाक़ई बहुत बड़ा) कारनामा किया l” [मुस्लिम : 7106]
सय्यदना अब्दुल्लाह बिन मसूद रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “तुम में से हर शख़्स के साथ अल्लाह तआला ने जिन्नों में से उसका एक साथी (यानी एक शैतान) बना रखा है l” लोगो ने कहा, ऐ अल्लाह के रसूल! क्या आपके साथ भी? आपने फ़रमाया: “हाँ! लेकिन अल्लाह तआला ने उसके मुक़ाबले में मेरी मदद फ़रमाई है, सो वो मेरा फ़रमाबरदारहो गया है, इसलिए वो मुझे नेकी और अच्छाई ही कहता रहता है l” [मुस्लिम : 7108]
शैतान इन्सान के दिल पर डेरा डाले रखता है, जब इंसान गुनाह और गफ़लत में शामिल हो जाये तो वो वस्वसा पैदा करने लग जाता है और जब इन्सान अल्लाह तआला का ज़िक्र करने लग जाये तो वो पीछे हट जाता है l इन वस्वसो पर अगर अमल न किया जाये तो इस पर पकड़ नहीं हैं, सय्यदना अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “बेशक अल्लाह तआला ने मेरे लिए मेरी उम्मत के सीनों में पैदा होने वाले वस्वसे माफ़ कर दिए हैं l जब तक वो (उन पर) अमल न करें, या मुंह से न निकाले l” [बुख़ारी : 2528, मुस्लिम : 332]
सय्यदना अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया : “शैतान तुम में से किसी एक के पास आता है और उससे कहता है, यह चीज़ किसने पैदा की? वो किसने पैदा की? यहाँ तक कि वो कहता है, अल्लाह को किसने पैदा किया? जो जब शैतान किसी शख़्स के दिल में ऐसा वस्वसा डाले तो ऐसे शख़्स को चाहिए कि वो फ़ौरन अल्लाह तआला से पनाह मांगे और शैतानी ख़याल से बाज़ रहे l” [बुख़ारी : 3276, मुस्लिम 345]
सय्यदना अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “लोग हमेशा एक दुसरे से पूछते रहेंगें (कि फ़ला चीज़ किसने पैदा की, फ़ला चीज़ किसने पैदा की) यहाँ तक कि कहा जायेगा, अल्लाह ने तो सब को पैदा किया, अल्लाह को किसने पैदा किया? तो जो कोई इस क़िस्म का वस्वसा दिल में पाए तो कहे : {{ آمَنْتُ بِاللهِ }} मैं अल्लाह पर ईमान लाया l” [मुस्लिम : 343]
सय्यदना जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जब तुम में से किसी को कोई औरत अच्छी लगे और उसका ख़याल दिल में आये तो उसे चाहिए कि अपनी बीवी के पास आये, उससे सोहबत करे, क्यूंकि ऐसा करने से उसके दिल का ख़याल ख़तम हो जायेगा l” [मुस्लिम : 3409]
مِنَ الْجِنَّةِ وَ النَّاسِ : यानी जिनके दिलों में शैतान वस्वसे डालता है, वो जिन भी हैं और इन्सान भी lयह भी कहा गया है कि जो लोगो के दिलों में वसवसे डालते हैं वो शैतान इन्सानों और जिन्नों दोनों में से हैं, जैसा कि इरशाद फ़रमाया:
وَ كَذٰلِكَ جَعَلْنَا لِكُلِّ نَبِیٍّ عَدُوًّا شَیٰطِیْنَ الْاِنْسِ وَ الْجِنِّ یُوْحِیْ بَعْضُهُمْ اِلٰی بَعْضٍ زُخْرُفَ الْقَوْلِ غُرُوْرًا ؕ وَ لَوْ شَآءَ رَبُّكَ مَا فَعَلُوْهُ فَذَرْهُمْ وَ مَا یَفْتَرُوْنَ
 “और उसी तरह हमने हर नबी के लिए इन्सानों और जिन्नों के शैतानों को दुश्मन बना दिया, वो एक दुसरे को पुर फ़रेब बातें सिखाते हैं धोका देने के लिए और अगर तेरा रब चाहता तो वो ऐसा न करते, तो छोड़ उन्हें और जो वो झूट घड़ते हैं l”  [अनआम : 112]
और फ़रमाया:
وَ لَقَدْ خَلَقْنَا الْاِنْسَانَ وَ نَعْلَمُ مَا تُوَسْوِسُ بِهٖ نَفْسُهٗ ۖۚ وَ نَحْنُ اَقْرَبُ اِلَیْهِ مِنْ حَبْلِ الْوَرِیْدِ
“और बिलाशुबा यक़ीनन हमने इन्सान को पैदा किया और हम उन चीज़ों को जानते हैं जिनका वस्वसा उसका नफ़्स डालता है और हम उसकी रगे जां से भी ज़्यादा उसके क़रीब हैं l” [क़ाफ़ : 16]
सय्यदना अब्दुल्लाह बिन मसूद रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया : “तुममें से हर शख़्स के साथ अल्लाह तआला ने उसका एक साथी जिन्नों में और उसका एक साथी फरिश्तों में से मुक़र्रर कर दिया हैl” [मुस्लिम : 7109]
सय्यदना अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं कि एक आदमी नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में आया और कहने लगा, ऐ अल्लाह के रसूल! हमारे दिल में कुछ ख़यालात आते हैं और वो इशारे किनारे से कुछ इस तरह कह रहा था कि उन ख़यालात को ज़बान पर लाने के बजाये कोयला हो जाना उसे ज़्यादा पसंद है, तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर तारीफ़ उस अल्लाह की जिसने उस (इब्लीस) के मक्र को वस्वसे की तरफ़ लौटा दिया l” [अबू दावूद : 5112, सुनन कुबरा नसाई : 10504]    

1 الطَّهَارَةِ عَنْ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ किताब : तहारत के अहकाम ओ मसाइल

بَابُ مَا جَاءَ لاَ تُقْبَلُ صَلاَةٌ بِغَيْرِ طُهُورٍ

बाब 1 :- वुज़ू (तहारत) के बिना नमाज़ क़ुबूल न होने का बयान


١) حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ قَالَ: أَخْبَرَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ سِمَاكِ بْنِ حَرْبٍ، ح وحَدَّثَنَا هَنَّادٌ قَالَ: حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ إِسْرَائِيلَ، عَنْ سِمَاكٍ، عَنْ مُصْعَبِ بْنِ سَعْدٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، قَالَ: «لَا تُقْبَلُ صَلَاةٌ بِغَيْرِ طُهُورٍ وَلَا صَدَقَةٌ مِنْ غُلُولٍ»، قَالَ هَنَّادٌ فِي حَدِيثِهِ: إِلَّا بِطُهُورٍ. هَذَا الْحَدِيثُ أَصَحُّ شَيْءٍ فِي هَذَا الْبَابِ وَأَحْسَنُ. وَفِي الْبَابِ عَنْ أَبِي الْمَلِيحِ، عَنْ أَبِيهِ، وَأَبِي هُرَيْرَةَ، وَأَنَسٍ. وَأَبُو الْمَلِيحِ بْنُ أُسَامَةَ اسْمُهُ عَامِرٌ، وَيُقَالُ: زَيْدُ بْنُ أُسَامَةَ بْنِ عُمَيْرٍ الْهُذَلِيُّ


1) अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहू अन्हुमा से रिवायत है कि नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “नमाज़ बिना वुज़ू क़ुबूल नहीं की जाती और न सदक़ा हराम माल से क़ुबूल किया जाता है l” इमाम तिरमिज़ी कहते हैं: इस बाब में यह हदीस सबसे सहीह और हसन है l इस बाब में अबू मलीह के वालिद उसामा, अबू हुरैरा और अनस रज़ियल्लाहू अन्हुम से भी हदीसें आई हैंl



तख़रीज : सहीह मुस्लिम (535) ,सुनन अबू दावूद (59) इब्ने माजा (272)





1 - كِتَاب الطَّهَارَةِ तहारत के अहकाम ओ मसाइल

بَابُ التَّخَلِّي عِنْدَ قَضَاءِ الْحَاجَةِ

बाब 1: तहारत के अहकाम ओ मसाइल

١) حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ بْنِ قَعْنَبٍ الْقَعْنَبِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ يَعْنِي ابْنَ مُحَمَّدٍ، عَنْ مُحَمَّدٍ يَعْنِي ابْنَ عَمْرٍو، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنِ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ «أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا ذَهَبَ الْمَذْهَبَ أَبْعَدَ»


1) हज़रत मूगीरह बिन शोबा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं : नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब ख़ला (पेशाब, पाखाना) के लिए जाते तो (आबादी से) दूर चले जाते l

तख़रीज : तिरमिज़ी (20), नसाई (17),  इब्ने माजा (331)

तहकीम : ज़ुबैर अली ज़ई:- हसन
        शेख़ अलबानी:- हसन सहीह
        शुएब अरनऊत:- सहीह लिग़ेरिह

مقدمة الإمام مسلم رحمه الله मुक़दमा सहीह मुस्लिम

بَابُ وُجُوبِ الرِّوَايَةِ عَنِ الثِّقَاتِ، وَتَرْكِ الْكَذَّابِينَ

बाब 1 : सिक़ा रावियों से हदीस बयान करना, कज्ज़ाबो (झूटों) को छोड़ने और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर झूट बांधने से बचना वाजिब है l


1) وَهُوَ الْأَثَرُ الْمَشْهُورُ عَنْ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ «مَنْ حَدَّثَ عَنِّي بِحَدِيثٍ يُرَى أَنَّهُ كَذِبٌ، فَهُوَ أَحَدُ الْكَاذِبِينَ». حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ شُعْبَةَ، عَنِ الْحَكَمِ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى، عَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدَبٍ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ أَيْضًا، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ شُعْبَةَ، وَسُفْيَانَ، عَنْ حَبِيبٍ، عَنْ مَيْمُونِ بْنِ أَبِي شَبِيبٍ، عَنِ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ، قَالَا: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَلِكَ
1) हज़रत समरह बिन जुन्दुब और मुगीरह बिन शोबा रज़ियल्लाहू अन्हुमा से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया : "जिसने मुझसे हदीस बयान की जिसे वो जानता है कि झूट है तो वो (दो) झूटों में से एक (झूठा) है l"


بَابُ فِي التَّحْذِيرِ مِنَ الْكَذِبِ عَلَى رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ تَعَالَى عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

बाब 2 : रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर झूट बोलने के बारे में सख़्ती


2) وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ، عَنْ شُعْبَةَ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَابْنُ بَشَّارٍ، قَالَا: حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةَ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ رِبْعِيِّ بْنِ حِرَاشٍ، أَنَّهُ سَمِعَ عَلِيًّا رَضِيَ اللهُ عَنْهُ يَخْطُبُ، قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: لَا تَكْذِبُوا عَلَيَّ، فَإِنَّهُ مَنْ يَكْذِبْ عَلَيَّ يَلِجِ النَّارَ
2) रबअी बिन हिराश ने हज़रत अली रज़ियल्लाहू अन्हु को ख़ुत्बा देते वक़्त ये फ़रमाते सुना कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "मुझ पर झूट न बोलो, बिलाशुबा जिसने मुझ पर झूट बोला वह जहन्नम में दाख़िल होगा l"

3) وحَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ يَعْنِي ابْنَ عُلَيَّةَ، عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ صُهَيْبٍ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّهُ قَالَ: إِنَّهُ لَيَمْنَعُنِي أَنْ أُحَدِّثَكُمْ حَدِيثًا كَثِيرًا أَنَّ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، قَالَ: «مَنْ تَعَمَّدَ عَلَيَّ كَذِبًا، فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنَ النَّارِ

3) हज़रत अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहू अन्हु दे रिवायत है, कहा मुझे तुम्हारे सामने ज्यादा हदीसे बयान करने से यह बात रोकती है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "जिसने जानबूझ कर मुझ पर झूट बोला वह आग में अपना ठिकाना बना ले l"

4) وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ الْغُبَرِيُّ، حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ أَبِي حَصِينٍ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: مَنْ كَذَبَ عَلَيَّ مُتَعَمِّدًا، فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنَ النَّارِ
4) हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है, कहा : रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "जिसने जानबूझ कर मुझ पर झूट बोला वह आग में अपना ठिकाना बना ले l"

5) وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللهِ بْنُ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ عُبَيْدٍ، حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ رَبِيعَةَ، قَالَ: أَتَيْتُ الْمَسْجِدَ وَالْمُغِيرَةُ أَمِيرُ الْكُوفَةِ، قَالَ: فَقَالَ الْمُغِيرَةُ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، يَقُولُ: إِنَّ كَذِبًا عَلَيَّ لَيْسَ كَكَذِبٍ عَلَى أَحَدٍ، فَمَنْ كَذَبَ عَلَيَّ مُتَعَمِّدًا، فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنَ النَّارِ
5) सईद बिन उबैद ने कहा: हमें अली बिन रबीआ वालिबी ने हदीस बयान की, कहा: मैं मस्जिद में आया और (उस वक़्त) हज़रत मुग़ीरा (बिन शोबा) कूफ़ा के अमीर (गवर्नर) थे,  मुग़ीरा ने कहा: मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुना, आप फ़रमा रहे थे: "मुझ पर झूट बोलना इस तरह नहीं जैसे (मेरे अलावा) किसी एक (आम) आदमी पर झूट बोलना है, जिसने जानबूझ कर मुझ पर झूट बोला वह जहन्नम में अपना ठिकाना बना लेl"

6) وحَدَّثَنِي عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ السَّعْدِيُّ، حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ، أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ قَيْسٍ الْأَسَدِيُّ، عَنْ عَلِيِّ بْنِ رَبِيعَةَ الْأَسَدِيِّ، عَنِ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمِثْلِهِ، وَلَمْ يَذْكُرْ: إِنَّ كَذِبًا عَلَيَّ لَيْسَ كَكَذِبٍ عَلَى أَحَدٍ
6) सय्य्दना मुग़ीरा बिन शोबा रज़ियल्लाहू अन्हु नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बयान करते हैं इन अलफ़ाज़ के अलावा "मुझ पर झूट बोलन तुम्हारा किसी आम शख्स पर झूट बोलना जैसा नहीं है l"

بَابُ النَّهْيِ عَنِ الْحَدِيثِ بِكُلِّ مَا سَمِعَ

बाब 3 : हर सुनी सुनाई बात बयान करने की मुमानिअत


7) وَحَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللهِ بْنُ مُعَاذٍ الْعَنْبَرِيُّ، حَدَّثَنَا أَبِي، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ قَالَا: حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ خُبَيْبِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ حَفْصِ بْنِ عَاصِمٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: كَفَى بِالْمَرْءِ كَذِبًا أَنْ يُحَدِّثَ بِكُلِّ مَا سَمِعَ
7) हफ्स बिन आसिम से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "आदमी के झूटा होने के लिए यही काफ़ी है कि वह हर सुनी हुई बात बयान कर दे l"

8) وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حَفْصِ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ خُبَيْبِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ حَفْصِ بْنِ عَاصِمٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمِثْلِ ذَلِكَ
8) हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहूअन्हु बयान करते हैं  कि उन्होंने नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम  से इस जैसी ही रिवायत बयान की l

9) وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا هُشَيْمٌ، عَنْ سُلَيْمَانَ التَّيْمِيِّ، عَنْ أَبِي عُثْمَانَ النَّهْدِيِّ، قَالَ: قَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللهُ تَعَالَى عَنْهُ: بِحَسْبِ الْمَرْءِ مِنَ الْكَذِبِ أَنْ يُحَدِّثَ بِكُلِّ مَا سَمِعَ
9) अबू उस्मान नहदी से से रिवायत है कि उमर बिन ख़त्ताब रज़ियल्लाहू अन्हु ने फ़रमाया: आदमी के लिए झूट से इतना काफ़ी है (जिसकी वजह से वो झूटा क़रार दिया जा सके) कि वह हर सुनी हुई बात बयान कर दे l

10) وحَدَّثَنِي أَبُو الطَّاهِرِ أَحْمَدُ بْنُ عَمْرِو بْنِ سَرْحٍ، قَالَ: أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، قَالَ: قَالَ لِي مَالِكٌ: اعْلَمْ أَنَّهُ لَيْسَ يَسْلَمُ رَجُلٌ حَدَّثَ بِكُلِّ مَا سَمِعَ، وَلَا يَكُونُ إِمَامًا أَبَدًا وَهُوَ يُحَدِّثُ بِكُلِّ مَا سَمِعَ
10) इबने वहब से रिवायत है कि इमाम मालिक ने मुझसे कहा: मुझे मालूम है कि ऐसा आदमी सही सालिम नहीं होता जो हर सुनी हुई बात आगे बयान कर दे, वह कभी इमाम नहीं बन सकता जो हर सुनी सुनाई बात को आगे बयान करता हो l

11) حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، قَالَ: حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ، قَالَ: حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ أَبِي الْأَحْوَصِ، عَنْ عَبْدِ اللهِ، قَالَ: بِحَسْبِ الْمَرْءِ مِنَ الْكَذِبِ أَنْ يُحَدِّثَ بِكُلِّ مَا سَمِعَ
11) अब्दुल्लाह बिन मसूद रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है कि उन्होंने कहा कि आदमी के लिए इतना झूट काफ़ी है कि वह हर सुनी हुई बात बयान कर दे l

12) حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، قَالَ: سَمِعْتُ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ مَهْدِيٍّ، يَقُولُ: لَا يَكُونُ الرَّجُلُ إِمَامًا يُقْتَدَى بِهِ حَتَّى يُمْسِكَ عَنْ بَعْضِ مَا سَمِعَ
12) अब्दुर रहमान बिन महदी बयान करते हैं कि आदमी उस वक़्त तक इमाम नहीं बन सकता कि लोग उसकी बात माने जब तक कि वह सुनी सुनाई बातों को बयान करने से रुक न जाये l

13) حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا عُمَرُ بْنُ عَلِيِّ بْنِ مُقَدَّمٍ، عَنْ سُفْيَانَ بْنِ حُسَيْنٍ، قَالَ: سَأَلَنِي إِيَاسُ بْنُ مُعَاوِيَةَ، فَقَالَ: إِنِّي أَرَاكَ قَدْ كَلِفْتَ بِعِلْمِ الْقُرْآنِ، فَاقْرَأْ عَلَيَّ سُورَةً، وَفَسِّرْ حَتَّى أَنْظُرَ فِيمَا عَلِمْتَ، قَالَ: فَفَعَلْتُ، فَقَالَ لِيَ: احْفَظْ عَلَيَّ مَا أَقُولُ لَكَ: إِيَّاكَ وَالشَّنَاعَةَ فِي الْحَدِيثِ، فَإِنَّهُ قَلَّمَا حَمَلَهَا أَحَدٌ إِلَّا ذَلَّ فِي نَفْسِهِ، وَكُذِّبَ فِي حَدِيثِهِ
13) सुफियान बिन हुसैन से रिवायत है, कहा: इयास बिन मआविया ने मुझ से कहा: मैं तुम्हे देखता हूँ कि तुम क़ुरान के इल्म से बहुत ज़्यादा शौक़ रखते हो, तुम मेरे सामने एक सुरह पढ़ो और उसकी तफ़सीर करो ताकि जो तुम्हे इल्म है मैं भी उसे देखूं l कहा: मैंने ऐसा किया तो उन्होंने मुझसे फ़रमाया: जो बात मैं तुम से कहने लगा हूँ उसे मेरी तरफ़ से हमेशा याद रखना, नापसंदीदा (मुनकर) रिवायतो को बयान करने से बचना! ऐसा न होने के बराबर है कि किसी ने यह काम किया हो (मुनकर रिवायते बयान कीं) और वह अपनी ज़ात में ज़लील न हुआ हो और उसकी बयान की हुई हदीस को झूटा न समझा गया हो l

14) حَدَّثَنِي أَبُو الطَّاهِرِ، وَحَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى، قَالَا: أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، قَالَ: أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللهِ بْنِ عَبْدِ اللهِ بْنِ عُتْبَةَ، أَنَّ عَبْدَ اللهِ بْنَ مَسْعُودٍ، قَالَ: مَا أَنْتَ بِمُحَدِّثٍ قَوْمًا حَدِيثًا لَا تَبْلُغُهُ عُقُولُهُمْ، إِلَّا كَانَ لِبَعْضِهِمْ فِتْنَةً
14) हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसूद रज़ियल्लाहू अन्हु ने फ़रमाया: तुम किसी क़ौम के सामने ऐसी हदीस बयान नहीं करते जिसके सही मफ़हूम तक उनकी अक़लें नहीं पहुँच सकतीं मगर वह उनमें से कुछ के लिए फ़ितने की वजह बन जाती हैं (इसीलिए लोगो की अक़लो के हिसाब से बात करो) l

باب النَّهْىِ عَنِ الرِّوَايَةِ عَنِ الضُّعَفَاءِ وَالاِحْتِيَاطِ فِي تَحَمُّلِهَا

बाब 4:- ज़ईफ़ रावियों से रिवायत की मुमानिअत और रिवायत की (हिफाज़त और बयान की) ज़िम्मेदारी उठाते हुए एहतियात

15) وحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللهِ بْنِ نُمَيْرٍ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، قَالَا: حَدَّثَنَا عَبْدُ اللهِ بْنُ يَزِيدَ، قَالَ: حَدَّثَنِي سَعِيدُ بْنُ أَبِي أَيُّوبَ، قَالَ: حَدَّثَنِي أَبُو هَانِئٍ، عَنْ أَبِي عُثْمَانَ مُسْلِمِ بْنِ يَسَارٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنْ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، أَنَّهُ قَالَ: سَيَكُونُ فِي آخِرِ أُمَّتِي أُنَاسٌ يُحَدِّثُونَكُمْ مَا لَمْ تَسْمَعُوا أَنْتُمْ، وَلَا آبَاؤُكُمْ، فَإِيَّاكُمْ وَإِيَّاهُمْ
15) अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूलुल्लाह सल्लालाल्हू अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "मेरी उम्मत के आख़िरी ज़माने में ऐसे लोग होंगें जो तुम्हारे सामने ऐसी हदीसें बयान करेंगें जो न तुमने सुनी होंगीं और न तुम्हारे बाप दादो ने सुनी होगी, तुम इस तरह के लोगो से दूर रहना l "

16) وحَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى بْنِ عَبْدِ اللهِ بْنِ حَرْمَلَةَ بْنِ عِمْرَانَ التُّجِيبِيُّ، قَالَ: حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، قَالَ: حَدَّثَنِي أَبُو شُرَيْحٍ أَنَّهُ سَمِعَ شَرَاحِيلَ بْنَ يَزِيدَ، يَقُولُ: أَخْبَرَنِي مُسْلِمُ بْنُ يَسَارٍ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ، يَقُولُ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: يَكُونُ فِي آخِرِ الزَّمَانِ دَجَّالُونَ كَذَّابُونَ، يَأْتُونَكُمْ مِنَ الْأَحَادِيثِ بِمَا لَمْ تَسْمَعُوا أَنْتُمْ، وَلَا آبَاؤُكُمْ، فَإِيَّاكُمْ وَإِيَّاهُمْ، لَا يُضِلُّونَكُمْ، وَلَا يَفْتِنُونَكُمْ
16) अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "आख़िरी ज़माने में ऐसे दज्जाल (धोकेबाज़) कज्ज़ाब (झूटे) होंगें जो तुम्हारे पास ऐसी हदीसे लायेंगें जो न तुमने सुनी होंगी और न तुम्हारे बाप दादो ने सुनी होंगीं, तुम उनसे दूर रहना कहीं वह तुम्हे गुमराह न कर दें और तुम्हें फ़ितने में न डाल दें l"

17) وحَدَّثَنِي أَبُو سَعِيدٍ الْأَشَجُّ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ، عَنِ الْمُسَيَّبِ بْنِ رَافِعٍ، عَنْ عَامِرِ بْنِ عَبْدَةَ، قَالَ: قَالَ عَبْدُ اللهِ: " إِنَّ الشَّيْطَانَ لِيَتَمَثَّلُ فِي صُورَةِ الرَّجُلِ، فَيَأْتِي الْقَوْمَ، فَيُحَدِّثُهُمْ بِالْحَدِيثِ مِنَ الْكَذِبِ، فَيَتَفَرَّقُونَ، فَيَقُولُ الرَّجُلُ مِنْهُمْ: سَمِعْتُ رَجُلًا أَعْرِفُ وَجْهَهُ، وَلَا أَدْرِي مَا اسْمُهُ يُحَدِّثُ "
17) हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसूद रज़ियल्लाहू अन्हु ने फ़रमाया: बेशक शैतान किसी आदमी की शकल इख़्तियार करता है, फिर लोगो के पास आता है और उन्हें झूट के आधार पर कोई हदीस सुनाता है, फिर वह अलग अलग हो जाते हैं, उनमें से कोई आदमी कहता है: मैंने एक आदमी से हदीस सुनी है, मैं उसका चेहरा तो पहचानता हूँ पर उसका नाम नहीं जानता, वह हदीस सुना रहा था l

18) وحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ ابْنِ طَاوُسٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ، قَالَ: إِنَّ فِي الْبَحْرِ شَيَاطِينَ مَسْجُونَةً، أَوْثَقَهَا سُلَيْمَانُ، يُوشِكُ أَنْ تَخْرُجَ، فَتَقْرَأَ عَلَى النَّاسِ قُرْآنًا
18) हज़रत अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत की, कहा:  समंदर में बहुत से शैतान क़ैद हैं जिन्हें हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम ने बाँधा था ,वक़्त आ रहा है कि वह निकलेंगे और लोगो के सामने क़ुरान पढेंगे l

19) وحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادٍ، وَسَعِيدُ بْنُ عَمْرٍو الْأَشْعَثِيُّ جَمِيعًا عَنِ ابْنِ عُيَيْنَةَ، قَالَ سَعِيدٌ: أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ، عَنْ هِشَامِ بْنِ حُجَيْرٍ، عَنْ طَاوُسٍ، قَالَ: جَاءَ هَذَا إِلَى ابْنِ عَبَّاسٍ - يَعْنِي بُشَيْرَ بْنَ كَعْبٍ - فَجَعَلَ يُحَدِّثُهُ، فَقَالَ لَهُ ابْنُ عَبَّاسٍ: عُدْ لِحَدِيثِ كَذَا وَكَذَا، فَعَادَ لَهُ، ثُمَّ حَدَّثَهُ، فَقَالَ لَهُ: عُدْ لِحَدِيثِ كَذَا وَكَذَا، فَعَادَ لَهُ، فَقَالَ لَهُ: مَا أَدْرِي أَعَرَفْتَ حَدِيثِي كُلَّهُ، وَأَنْكَرْتَ هَذَا؟ أَمْ أَنْكَرْتَ حَدِيثِي كُلَّهُ، وَعَرَفْتَ هَذَا؟ فَقَالَ لَهُ ابْنُ عَبَّاسٍ: إِنَّا كُنَّا نُحَدِّثُ عَنْ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذْ لَمْ يَكُنْ يُكْذَبُ عَلَيْهِ، فَلَمَّا رَكِبَ النَّاسُ الصَّعْبَ وَالذَّلُولَ، تَرَكْنَا الْحَدِيثَ عَنْهُ
19) हिशाम बिन हुजैर ने ताऊस से रिवायत की, कहा: यह (उनकी मुराद बुशैर बिन कआब से थी) हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हु ने इससे कहा: फुलां हदीस दोहराओ, इसने दोहरा दी, फिर उनके सामने हदीसे बयान कीं, उन्होंने इससे कहा: फुलां हदीस दोबारा सुनाओ l इसने उनके सामने दोहराईं, फिर आपसे कहा: मैं नहीं जानता कि आपने मेरी (बयान की हुई) सारी हदीसे पहचान ली हैं और इस हदीस को मुनकर जाना है या सबको मुनकर जाना है और इसे पहचान लिया है? हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा ने इससे कहा: जब आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम  पर झूठ नहीं बोला जाता था हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से हदीसे बयान करते थे फिर जब लोग हर मुश्किल और आसन सवारी  पर सवार होने लगे (बिला तमीज़ सही और ज़ईफ़ रिवायते बयान करने लगे) तो हमने बिना वास्ते के आप सल्ललहुअलह्वसल्लम से हदीस बयान करना छोड़ दिया l

20) وحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ ابْنِ طَاوُسٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ: إِنَّمَا كُنَّا نَحْفَظُ الْحَدِيثَ، وَالْحَدِيثُ يُحْفَظُ عَنْ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، فَأَمَّا إِذْ رَكِبْتُمْ كُلَّ صَعْبٍ وَذَلُولٍ، فَهَيْهَاتَ
20) हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा ने रिवायत की, उन्होंने कहा: हम रसूलुल्लाह सल्ल्लाल्लाहू अलैहि की हदीसे हिफ्ज़ करते थे और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मरवी हदीस की हिफाज़त की जाती थी मगर जब से तुम लोगों ने बिना तमीज़ के हर मुश्किल और आसान पर सवारी शुरू कर दी तो यह मामला दूर हो गया (यह मुश्किल हो गया कि हमारी तरह एहतियात करने वाले लोग इस तरह बयान की गयी हदीसो को क़ुबूल करें, फिर याद रखें)l

21) وحَدَّثَنِي أَبُو أَيُّوبَ سُلَيْمَانُ بْنُ عُبَيْدِ اللهِ الْغَيْلَانِيُّ، حَدَّثَنَا أَبُو عَامِرٍ يَعْنِي الْعَقَدِيَّ، حَدَّثَنَا رَبَاحٌ، عَنْ قَيْسِ بْنِ سَعْدٍ، عَنْ مُجَاهِدٍ، قَالَ: جَاءَ بُشَيْرٌ الْعَدَوِيُّ إِلَى ابْنِ عَبَّاسٍ، فَجَعَلَ يُحَدِّثُ، وَيَقُولُ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، فَجَعَلَ ابْنُ عَبَّاسٍ لَا يَأْذَنُ لِحَدِيثِهِ، وَلَا يَنْظُرُ إِلَيْهِ، فَقَالَ: يَا ابْنَ عَبَّاسٍ، مَالِي لَا أَرَاكَ تَسْمَعُ لِحَدِيثِي، أُحَدِّثُكَ عَنْ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، وَلَا تَسْمَعُ، فَقَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ: " إِنَّا كُنَّا مَرَّةً إِذَا سَمِعْنَا رَجُلًا يَقُولُ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، ابْتَدَرَتْهُ أَبْصَارُنَا، وَأَصْغَيْنَا إِلَيْهِ بِآذَانِنَا، فَلَمَّا رَكِبَ النَّاسُ الصَّعْبَ، وَالذَّلُولَ، لَمْ نَأْخُذْ مِنَ النَّاسِ إِلَّا مَا نَعْرِفُ "

21) मुजाहिद से रिवायत है कि बुशैर बिन कआब अदअवी हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा के पास आया और उसने हदीसे बयान करते हुए कहना शुरू कर दिया: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया l हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा ने यह रवय्या रखा कि न उसको ध्यान से सुनते थे और न उसकी तरफ़ देखते थे l वह कहने लगा: ऐ इब्ने अब्बास! साथ क्या मामला है, मुझे नज़र नहीं आता कि आप मेरी बयान की हुई हदीस सुन रहे हैं? मैं आपको रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से हदीस सुना रहा हूँ और आप सुनते ही नहीं l हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा ने फ़रमाया: एक वक़्त ऐसा था कि जब हम किसी को यह कहते सुनते: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया तो हमारी नज़रें फ़ौरन उसकी तरफ़ उठ जाती और हम कान लगा कर ग़ौर से उसकी बात सुनते, फ़िर जब लोगो ने बिना तमीज़ हर मुश्किल और आसान सवारी शुरू कर दी तो हमने लोगो से कोई हदीस क़ुबूल न की सिवाए उस हदीस के जिसे हम जानते थे l 


22) حَدَّثَنَا دَاوُدُ بْنُ عَمْرٍو الضَّبِّيُّ، حَدَّثَنَا نَافِعُ بْنُ عُمَرَ، عَنِ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ، قَالَ: كَتَبْتُ إِلَى ابْنِ عَبَّاسٍ أَسْأَلُهُ أَنْ يَكْتُبَ لِي كِتَابًا، وَيُخْفِي عَنِّي، فَقَالَ: «وَلَدٌ نَاصِحٌ أَنَا أَخْتَارُ لَهُ الْأُمُورَ اخْتِيَارًا،وَأُخْفِي عَنْهُ»، قَالَ: فَدَعَا بِقَضَاءِ عَلِيٍّ، فَجَعَلَ يَكْتُبُ مِنْهُ أَشْيَاءَ، وَيَمُرُّ بِهِ الشَّيْءُ، فَيَقُولُ: «وَاللهِ مَا قَضَى بِهَذَا عَلِيٌّ إِلَّا أَنْ يَكُونَ ضَلَّ 
22) इब्ने अबी मुलैका से रिवायत है, कहा: मैंने हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा की तरफ़ लिखा उनसे गुज़ारिश की कि वह मेरे लिए एक किताब लिखें (और जिन बातों की सेहत सही न हो या जो न लिखने की हो) बातें मुझसे छुपा लें l उन्होंने फ़रमाया: लड़का नसीहत करता है, मैं उसके लिए (हदीस के बारे में) सारे मामलात में (सही हदीसो को) चुनूगाँ और(मौज़ू और मनगढ़ंत हदीसो को) हटा दूंगाl (कहा: उन्होंने हज़रत अली रज़ियल्लाहू अन्हु के फ़ैसले मंगवाएं) और उनमें से चीज़ें लिखनी शुरू कीं और(यह हुआ कि) कोई चीज़ गुज़रती तो फ़रमाते: अल्लाह की क़सम! यह फ़ैसला हज़रत अली रज़ियल्लाहू अन्हु ने नहीं किया,उन्होंनेसिवाये इसके कि (अल्लाह न करे) वह गुमराह हो गए हों (जबकी ऐसा नहीं हुआ)

23) حَدَّثَنَا عَمْرٌو النَّاقِدُ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ هِشَامِ بْنِ حُجَيْرٍ، عَنْ طَاوُسٍ، قَالَ: «أُتِيَ ابْنُ عَبَّاسٍ بِكِتَابٍ فِيهِ قَضَاءُ عَلِيٍّ رَضِيَ اللهُ عَنْهُ، فَمَحَاهُ إِلَّا قَدْرَ»، وَأَشَارَ سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ بِذِرَاعِهِ
23) ताऊस से रिवायत है, कहा: हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा के पास एक किताब लायी गयी जिसमे हज़रत अली रज़ियल्लाहू अन्हु के फ़ैसले (लिखे हुए) थे तो उन्होंने इतना छोड़ कर बाक़ी (सब कुछ) मिटा दिया और सुफ़ियान बिन उयैय्ना ने हाथ जितनी लम्बाई का इशारा किया (हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा के मुताबिक़ पूरी किताब में से इतनी ही तहरीर सही थी, बाक़ी सब झूट था) l

24) حَدَّثَنَا حَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ الْحُلْوَانِيُّ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ، حَدَّثَنَا ابْنُ إِدْرِيسَ، عَنِ الْأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، قَالَ: " لَمَّا أَحْدَثُوا تِلْكَ الْأَشْيَاءَ بَعْدَ عَلِيٍّ رَضِيَ اللهُ عَنْهُ، قَالَ رَجُلٌ مِنْ أَصْحَابِ عَلِيٍّ: قَاتَلَهُمُ اللهُ، أَيَّ عِلْمٍ أَفْسَدُوا
24) अबू इसहाक़ से रिवायत है, कहा: जब (बज़ाहिर हज़रत अली का नाम लेने वाले) लोगो ने हज़रत अली रज़ियल्लाहू अन्हु के बाद (उनके नाम पर) यह चीज़ें एजाद कर ली तो उनके साथियों में से एक शख़स ने कहा: अल्लाह इन लोगो को क़त्ल करे! इन्होने कैसा बड़ा इल्म बिगाड़ दिया l

25) حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ خَشْرَمٍ، أَخْبَرَنَا أَبُو بَكْرٍ يَعْنِي ابْنَ عَيَّاشٍ، قَالَ: سَمِعْتُ الْمُغِيرَةَ، يَقُولُ: لَمْ يَكُنْ يَصْدُقُ عَلَى عَلِيٍّ رَضِيَ اللهُ عَنْهُ فِي الْحَدِيثِ عَنْهُ إِلَّا مِنْ أَصْحَابِ عَبْدِ اللهِ بْنِ مَسْعُودٍ
25) हज़रत मुगीरा रज़ियल्लाहू अन्हु फ़रमाते थे: हज़रत अली रज़ियल्लाहू अन्हु से मरवी हदीसो में किसी चीज़ के सच होने को नहीं माना जाता था सिवाए उसके जो अब्दुल्लाह बिन मसूद रज़ियल्लाहू अन्हु के शागिर्दों से रिवायत की गयी हो l

26) حَدَّثَنَا حَسَنُ بْنُ الرَّبِيعِ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ أَيُّوبَ، وَهِشَامٍ، عَنْ مُحَمَّدٍ، وَحَدَّثَنَا فُضَيْلٌ، عَنْ هِشَامٍ قَالَ: وَحَدَّثَنَا مَخْلَدُ بْنُ حُسَيْنٍ، عَنْ هِشَامٍ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ، قَالَ: إِنَّ هَذَا الْعِلْمَ دِينٌ، فَانْظُرُوا عَمَّنْ تَأْخُذُونَ دِينَكُمْ 
26) मुहम्मद बिन सिरीन ने कहा: यह इल्म दीन है, इसलिए अच्छी तरह देख लो कि तुम किन लोगो से अपना दीन ले रहे हो l




بَدْءِ الوَحْيِ वही की शुरुआत का बयान

كَيْفَ كَانَ بَدْءُ الوَحْيِ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ؟ وَقَوْلُ اللَّهِ جَلَّ ذِكْرُهُ: {إِنَّا أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ كَمَا أَوْحَيْنَا إِلَى نُوحٍ وَالنَّبِيِّينَ مِنْ بَعْدِهِ} [النساء: 163]


बाब 1: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर वही की शुरआत कैसे हुई? अल्लाह तआला के फ़रमान (की वज़ाहत) : "हमने आपकी तरफ़ उसी तरह वही नाज़िल फ़रमाई है जैसे हज़रत नूह अलैहिस्सलाम और उनके बाद आने वाले सारे नबियों की तरफ़ नाज़िल की थी"

١) حَدَّثَنَا الحُمَيْدِيُّ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الزُّبَيْرِ، قَالَ: حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، قَالَ: حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الأَنْصَارِيُّ، قَالَ: أَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيُّ، أَنَّهُ سَمِعَ عَلْقَمَةَ بْنَ وَقَّاصٍ اللَّيْثِيَّ، يَقُولُ: سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَلَى المِنْبَرِ قَالَ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ: إِنَّمَا الأَعْمَالُ بِالنِّيَّاتِ، وَإِنَّمَا لِكُلِّ امْرِئٍ مَا نَوَى، فَمَنْ كَانَتْ هِجْرَتُهُ إِلَى دُنْيَا يُصِيبُهَا، أَوْ إِلَى امْرَأَةٍ يَنْكِحُهَا، فَهِجْرَتُهُ إِلَى مَا هَاجَرَ إِلَيْهِ


1) हज़रत अलक़मा बिन वक्क़ास लैसी कहते हैं कि मैंने हज़रत उमर बिन ख़त्ताब रज़ियल्लाहू अन्हु को मिंबर पर यह कहते सुना कि मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुना, आप फ़रमा रहे थे : "आमाल का दारोमदार नीयतों पर है और हर आदमी को उसकी नियत ही के मुताबिक़ फल मिलेगा, फ़िर जिस शख्स ने दुनया कमाने या किसी औरत से शादी रचाने के लिए वतन छोड़ा तो उसकी हिजरत उसी काम के लिए है जिसके लिए उसने हिजरत की l"


तख़रीज : सहीह मुस्लिम (4927), अबू दावूद (2201), तिरमिज़ी (1647), नसाई (75), इब्ने माजा (4227)
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  مُقَدّمَة                                                                                    मुक़दमा    ١) عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَض...