रबअी बिन हिराश ने हज़रत अली रज़ियल्लाहू अन्हु को ख़ुत्बा देते वक़्त ये फ़रमाते सुना कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "मुझ पर झूट न बोलो, बिलाशुबा जिसने मुझ पर झूट बोला वह जहन्नम में दाख़िल होगा l"
हज़रत अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहू अन्हु दे रिवायत है, कहा मुझे तुम्हारे सामने ज्यादा हदीसे बयान करने से यह बात रोकती है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "जिसने जानबूझ कर मुझ पर झूट बोला वह आग में अपना ठिकाना बना ले l"
हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है, कहा : रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "जिसने जानबूझ कर मुझ पर झूट बोला वह आग में अपना ठिकाना बना ले l"
सईद बिन उबैद ने कहा: हमें अली बिन रबीआ वालिबी ने हदीस बयान की, कहा: मैं मस्जिद में आया और (उस वक़्त) हज़रत मुग़ीरा (बिन शोबा) कूफ़ा के अमीर (गवर्नर) थे, मुग़ीरा ने कहा: मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुना, आप फ़रमा रहे थे: "मुझ पर झूट बोलना इस तरह नहीं जैसे (मेरे अलावा) किसी एक (आम) आदमी पर झूट बोलना है, जिसने जानबूझ कर मुझ पर झूट बोला वह जहन्नम में अपना ठिकाना बना लेl"
6) सय्य्दना मुग़ीरा बिन शोबा रज़ियल्लाहू अन्हु नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बयान करते हैं इन अलफ़ाज़ के अलावा "मुझ पर झूट बोलन तुम्हारा किसी आम शख्स पर झूट बोलना जैसा नहीं है l"
अबू उस्मान नहदी से से रिवायत है कि उमर बिन ख़त्ताब रज़ियल्लाहू अन्हु ने फ़रमाया: आदमी के लिए झूट से इतना काफ़ी है (जिसकी वजह से वो झूटा क़रार दिया जा सके) कि वह हर सुनी हुई बात बयान कर दे l
10) इबने वहब से रिवायत है कि इमाम मालिक ने मुझसे कहा: मुझे मालूम है कि ऐसा आदमी सही सालिम नहीं होता जो हर सुनी हुई बात आगे बयान कर दे, वह कभी इमाम नहीं बन सकता जो हर सुनी सुनाई बात को आगे बयान करता हो l
11) حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، قَالَ: حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ، قَالَ: حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ أَبِي الْأَحْوَصِ، عَنْ عَبْدِ اللهِ، قَالَ: بِحَسْبِ الْمَرْءِ مِنَ الْكَذِبِ أَنْ يُحَدِّثَ بِكُلِّ مَا سَمِعَ
11) अब्दुल्लाह बिन मसूद रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है कि उन्होंने कहा कि आदमी के लिए इतना झूट काफ़ी है कि वह हर सुनी हुई बात बयान कर दे l
12) حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، قَالَ: سَمِعْتُ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ مَهْدِيٍّ، يَقُولُ: لَا يَكُونُ الرَّجُلُ إِمَامًا يُقْتَدَى بِهِ حَتَّى يُمْسِكَ عَنْ بَعْضِ مَا سَمِعَ
12) अब्दुर रहमान बिन महदी बयान करते हैं कि आदमी उस वक़्त तक इमाम नहीं बन सकता कि लोग उसकी बात माने जब तक कि वह सुनी सुनाई बातों को बयान करने से रुक न जाये l
13) حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا عُمَرُ بْنُ عَلِيِّ بْنِ مُقَدَّمٍ، عَنْ سُفْيَانَ بْنِ حُسَيْنٍ، قَالَ: سَأَلَنِي إِيَاسُ بْنُ مُعَاوِيَةَ، فَقَالَ: إِنِّي أَرَاكَ قَدْ كَلِفْتَ بِعِلْمِ الْقُرْآنِ، فَاقْرَأْ عَلَيَّ سُورَةً، وَفَسِّرْ حَتَّى أَنْظُرَ فِيمَا عَلِمْتَ، قَالَ: فَفَعَلْتُ، فَقَالَ لِيَ: احْفَظْ عَلَيَّ مَا أَقُولُ لَكَ: إِيَّاكَ وَالشَّنَاعَةَ فِي الْحَدِيثِ، فَإِنَّهُ قَلَّمَا حَمَلَهَا أَحَدٌ إِلَّا ذَلَّ فِي نَفْسِهِ، وَكُذِّبَ فِي حَدِيثِهِ
13) सुफियान बिन हुसैन से रिवायत है, कहा: इयास बिन मआविया ने मुझ से कहा: मैं तुम्हे देखता हूँ कि तुम क़ुरान के इल्म से बहुत ज़्यादा शौक़ रखते हो, तुम मेरे सामने एक सुरह पढ़ो और उसकी तफ़सीर करो ताकि जो तुम्हे इल्म है मैं भी उसे देखूं l कहा: मैंने ऐसा किया तो उन्होंने मुझसे फ़रमाया: जो बात मैं तुम से कहने लगा हूँ उसे मेरी तरफ़ से हमेशा याद रखना, नापसंदीदा (मुनकर) रिवायतो को बयान करने से बचना! ऐसा न होने के बराबर है कि किसी ने यह काम किया हो (मुनकर रिवायते बयान कीं) और वह अपनी ज़ात में ज़लील न हुआ हो और उसकी बयान की हुई हदीस को झूटा न समझा गया हो l
14) حَدَّثَنِي أَبُو الطَّاهِرِ، وَحَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى، قَالَا: أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، قَالَ: أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللهِ بْنِ عَبْدِ اللهِ بْنِ عُتْبَةَ، أَنَّ عَبْدَ اللهِ بْنَ مَسْعُودٍ، قَالَ: مَا أَنْتَ بِمُحَدِّثٍ قَوْمًا حَدِيثًا لَا تَبْلُغُهُ عُقُولُهُمْ، إِلَّا كَانَ لِبَعْضِهِمْ فِتْنَةً
14) हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसूद रज़ियल्लाहू अन्हु ने फ़रमाया: तुम किसी क़ौम के सामने ऐसी हदीस बयान नहीं करते जिसके सही मफ़हूम तक उनकी अक़लें नहीं पहुँच सकतीं मगर वह उनमें से कुछ के लिए फ़ितने की वजह बन जाती हैं (इसीलिए लोगो की अक़लो के हिसाब से बात करो) l
باب النَّهْىِ عَنِ الرِّوَايَةِ عَنِ الضُّعَفَاءِ
وَالاِحْتِيَاطِ فِي تَحَمُّلِهَا
बाब 4:- ज़ईफ़ रावियों से रिवायत की मुमानिअत और रिवायत की (हिफाज़त और बयान की) ज़िम्मेदारी उठाते हुए एहतियात
15) وحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللهِ بْنِ نُمَيْرٍ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، قَالَا: حَدَّثَنَا عَبْدُ اللهِ بْنُ يَزِيدَ، قَالَ: حَدَّثَنِي سَعِيدُ بْنُ أَبِي أَيُّوبَ، قَالَ: حَدَّثَنِي أَبُو هَانِئٍ، عَنْ أَبِي عُثْمَانَ مُسْلِمِ بْنِ يَسَارٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنْ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، أَنَّهُ قَالَ: سَيَكُونُ فِي آخِرِ أُمَّتِي أُنَاسٌ يُحَدِّثُونَكُمْ مَا لَمْ تَسْمَعُوا أَنْتُمْ، وَلَا آبَاؤُكُمْ، فَإِيَّاكُمْ وَإِيَّاهُمْ
15) अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूलुल्लाह सल्लालाल्हू अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "मेरी उम्मत के आख़िरी ज़माने में ऐसे लोग होंगें जो तुम्हारे सामने ऐसी हदीसें बयान करेंगें जो न तुमने सुनी होंगीं और न तुम्हारे बाप दादो ने सुनी होगी, तुम इस तरह के लोगो से दूर रहना l "
16) وحَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى بْنِ عَبْدِ اللهِ بْنِ حَرْمَلَةَ بْنِ عِمْرَانَ التُّجِيبِيُّ، قَالَ: حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، قَالَ: حَدَّثَنِي أَبُو شُرَيْحٍ أَنَّهُ سَمِعَ شَرَاحِيلَ بْنَ يَزِيدَ، يَقُولُ: أَخْبَرَنِي مُسْلِمُ بْنُ يَسَارٍ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ، يَقُولُ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: يَكُونُ فِي آخِرِ الزَّمَانِ دَجَّالُونَ كَذَّابُونَ، يَأْتُونَكُمْ مِنَ الْأَحَادِيثِ بِمَا لَمْ تَسْمَعُوا أَنْتُمْ، وَلَا آبَاؤُكُمْ، فَإِيَّاكُمْ وَإِيَّاهُمْ، لَا يُضِلُّونَكُمْ، وَلَا يَفْتِنُونَكُمْ
16) अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "आख़िरी ज़माने में ऐसे दज्जाल (धोकेबाज़) कज्ज़ाब (झूटे) होंगें जो तुम्हारे पास ऐसी हदीसे लायेंगें जो न तुमने सुनी होंगी और न तुम्हारे बाप दादो ने सुनी होंगीं, तुम उनसे दूर रहना कहीं वह तुम्हे गुमराह न कर दें और तुम्हें फ़ितने में न डाल दें l"
17) وحَدَّثَنِي أَبُو سَعِيدٍ الْأَشَجُّ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ، عَنِ الْمُسَيَّبِ بْنِ رَافِعٍ، عَنْ عَامِرِ بْنِ عَبْدَةَ، قَالَ: قَالَ عَبْدُ اللهِ: " إِنَّ الشَّيْطَانَ لِيَتَمَثَّلُ فِي صُورَةِ الرَّجُلِ، فَيَأْتِي الْقَوْمَ، فَيُحَدِّثُهُمْ بِالْحَدِيثِ مِنَ الْكَذِبِ، فَيَتَفَرَّقُونَ، فَيَقُولُ الرَّجُلُ مِنْهُمْ: سَمِعْتُ رَجُلًا أَعْرِفُ وَجْهَهُ، وَلَا أَدْرِي مَا اسْمُهُ يُحَدِّثُ "
17) हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसूद रज़ियल्लाहू अन्हु ने फ़रमाया: बेशक शैतान किसी आदमी की शकल इख़्तियार करता है, फिर लोगो के पास आता है और उन्हें झूट के आधार पर कोई हदीस सुनाता है, फिर वह अलग अलग हो जाते हैं, उनमें से कोई आदमी कहता है: मैंने एक आदमी से हदीस सुनी है, मैं उसका चेहरा तो पहचानता हूँ पर उसका नाम नहीं जानता, वह हदीस सुना रहा था l
18) وحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ ابْنِ طَاوُسٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ، قَالَ: إِنَّ فِي الْبَحْرِ شَيَاطِينَ مَسْجُونَةً، أَوْثَقَهَا سُلَيْمَانُ، يُوشِكُ أَنْ تَخْرُجَ، فَتَقْرَأَ عَلَى النَّاسِ قُرْآنًا
18) हज़रत अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत की, कहा: समंदर में बहुत से शैतान क़ैद हैं जिन्हें हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम ने बाँधा था ,वक़्त आ रहा है कि वह निकलेंगे और लोगो के सामने क़ुरान पढेंगे l
19) وحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادٍ، وَسَعِيدُ بْنُ عَمْرٍو الْأَشْعَثِيُّ جَمِيعًا عَنِ ابْنِ عُيَيْنَةَ، قَالَ سَعِيدٌ: أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ، عَنْ هِشَامِ بْنِ حُجَيْرٍ، عَنْ طَاوُسٍ، قَالَ: جَاءَ هَذَا إِلَى ابْنِ عَبَّاسٍ - يَعْنِي بُشَيْرَ بْنَ كَعْبٍ - فَجَعَلَ يُحَدِّثُهُ، فَقَالَ لَهُ ابْنُ عَبَّاسٍ: عُدْ لِحَدِيثِ كَذَا وَكَذَا، فَعَادَ لَهُ، ثُمَّ حَدَّثَهُ، فَقَالَ لَهُ: عُدْ لِحَدِيثِ كَذَا وَكَذَا، فَعَادَ لَهُ، فَقَالَ لَهُ: مَا أَدْرِي أَعَرَفْتَ حَدِيثِي كُلَّهُ، وَأَنْكَرْتَ هَذَا؟ أَمْ أَنْكَرْتَ حَدِيثِي كُلَّهُ، وَعَرَفْتَ هَذَا؟ فَقَالَ لَهُ ابْنُ عَبَّاسٍ: إِنَّا كُنَّا نُحَدِّثُ عَنْ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذْ لَمْ يَكُنْ يُكْذَبُ عَلَيْهِ، فَلَمَّا رَكِبَ النَّاسُ الصَّعْبَ وَالذَّلُولَ، تَرَكْنَا الْحَدِيثَ عَنْهُ
19) हिशाम बिन हुजैर ने ताऊस से रिवायत की, कहा: यह (उनकी मुराद बुशैर बिन कआब से थी) हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हु ने इससे कहा: फुलां हदीस दोहराओ, इसने दोहरा दी, फिर उनके सामने हदीसे बयान कीं, उन्होंने इससे कहा: फुलां हदीस दोबारा सुनाओ l इसने उनके सामने दोहराईं, फिर आपसे कहा: मैं नहीं जानता कि आपने मेरी (बयान की हुई) सारी हदीसे पहचान ली हैं और इस हदीस को मुनकर जाना है या सबको मुनकर जाना है और इसे पहचान लिया है? हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा ने इससे कहा: जब आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर झूठ नहीं बोला जाता था हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से हदीसे बयान करते थे फिर जब लोग हर मुश्किल और आसन सवारी पर सवार होने लगे (बिला तमीज़ सही और ज़ईफ़ रिवायते बयान करने लगे) तो हमने बिना वास्ते के आप सल्ललहुअलह्वसल्लम से हदीस बयान करना छोड़ दिया l
20) وحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ ابْنِ طَاوُسٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ: إِنَّمَا كُنَّا نَحْفَظُ الْحَدِيثَ، وَالْحَدِيثُ يُحْفَظُ عَنْ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، فَأَمَّا إِذْ رَكِبْتُمْ كُلَّ صَعْبٍ وَذَلُولٍ، فَهَيْهَاتَ
20) हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा ने रिवायत की, उन्होंने कहा: हम रसूलुल्लाह सल्ल्लाल्लाहू अलैहि की हदीसे हिफ्ज़ करते थे और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मरवी हदीस की हिफाज़त की जाती थी मगर जब से तुम लोगों ने बिना तमीज़ के हर मुश्किल और आसान पर सवारी शुरू कर दी तो यह मामला दूर हो गया (यह मुश्किल हो गया कि हमारी तरह एहतियात करने वाले लोग इस तरह बयान की गयी हदीसो को क़ुबूल करें, फिर याद रखें)l
21) وحَدَّثَنِي أَبُو أَيُّوبَ سُلَيْمَانُ بْنُ عُبَيْدِ اللهِ الْغَيْلَانِيُّ، حَدَّثَنَا أَبُو عَامِرٍ يَعْنِي الْعَقَدِيَّ، حَدَّثَنَا رَبَاحٌ، عَنْ قَيْسِ بْنِ سَعْدٍ، عَنْ مُجَاهِدٍ، قَالَ: جَاءَ بُشَيْرٌ الْعَدَوِيُّ إِلَى ابْنِ عَبَّاسٍ، فَجَعَلَ يُحَدِّثُ، وَيَقُولُ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، فَجَعَلَ ابْنُ عَبَّاسٍ لَا يَأْذَنُ لِحَدِيثِهِ، وَلَا يَنْظُرُ إِلَيْهِ، فَقَالَ: يَا ابْنَ عَبَّاسٍ، مَالِي لَا أَرَاكَ تَسْمَعُ لِحَدِيثِي، أُحَدِّثُكَ عَنْ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، وَلَا تَسْمَعُ، فَقَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ: " إِنَّا كُنَّا مَرَّةً إِذَا سَمِعْنَا رَجُلًا يَقُولُ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، ابْتَدَرَتْهُ أَبْصَارُنَا، وَأَصْغَيْنَا إِلَيْهِ بِآذَانِنَا، فَلَمَّا رَكِبَ النَّاسُ الصَّعْبَ، وَالذَّلُولَ، لَمْ نَأْخُذْ مِنَ النَّاسِ إِلَّا مَا نَعْرِفُ "
21) मुजाहिद से रिवायत
है कि बुशैर बिन कआब अदअवी हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा के पास
आया और उसने हदीसे बयान करते हुए कहना शुरू कर दिया: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि
वसल्लम ने फ़रमाया, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया l हज़रत इब्ने
अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा ने यह रवय्या रखा कि न उसको ध्यान से सुनते थे और न
उसकी तरफ़ देखते थे l वह कहने लगा: ऐ इब्ने अब्बास! साथ क्या मामला है, मुझे नज़र
नहीं आता कि आप मेरी बयान की हुई हदीस सुन रहे हैं? मैं आपको रसूलुल्लाह
सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से हदीस सुना रहा हूँ और आप सुनते ही नहीं l हज़रत इब्ने
अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा ने फ़रमाया: एक वक़्त ऐसा था कि जब हम किसी को यह कहते
सुनते: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया तो हमारी नज़रें फ़ौरन उसकी
तरफ़ उठ जाती और हम कान लगा कर ग़ौर से उसकी बात सुनते, फ़िर जब लोगो ने बिना तमीज़ हर
मुश्किल और आसान सवारी शुरू कर दी तो हमने लोगो से कोई हदीस क़ुबूल न की सिवाए उस
हदीस के जिसे हम जानते थे l
22) حَدَّثَنَا دَاوُدُ بْنُ عَمْرٍو الضَّبِّيُّ،
حَدَّثَنَا نَافِعُ بْنُ عُمَرَ، عَنِ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ، قَالَ: كَتَبْتُ
إِلَى ابْنِ عَبَّاسٍ أَسْأَلُهُ أَنْ يَكْتُبَ لِي كِتَابًا، وَيُخْفِي عَنِّي،
فَقَالَ: «وَلَدٌ نَاصِحٌ أَنَا أَخْتَارُ لَهُ الْأُمُورَ اخْتِيَارًا،وَأُخْفِي
عَنْهُ»، قَالَ: فَدَعَا بِقَضَاءِ عَلِيٍّ، فَجَعَلَ يَكْتُبُ مِنْهُ أَشْيَاءَ،
وَيَمُرُّ بِهِ الشَّيْءُ، فَيَقُولُ: «وَاللهِ مَا قَضَى بِهَذَا
عَلِيٌّ إِلَّا أَنْ يَكُونَ ضَلَّ
22) इब्ने अबी मुलैका से रिवायत है, कहा: मैंने हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास
रज़ियल्लाहू अन्हुमा की तरफ़ लिखा उनसे गुज़ारिश की कि वह मेरे लिए एक किताब
लिखें (और जिन बातों की सेहत सही न हो या जो न लिखने की हो) बातें मुझसे छुपा लें
l उन्होंने फ़रमाया: लड़का नसीहत करता है, मैं उसके लिए (हदीस के बारे में) सारे मामलात में (सही हदीसो को)
चुनूगाँ और(मौज़ू और मनगढ़ंत हदीसो को) हटा दूंगाl (कहा: उन्होंने हज़रत अली
रज़ियल्लाहू अन्हु
के फ़ैसले मंगवाएं) और उनमें से चीज़ें लिखनी शुरू कीं
और(यह हुआ कि) कोई चीज़ गुज़रती तो फ़रमाते: अल्लाह की क़सम! यह फ़ैसला हज़रत अली रज़ियल्लाहू अन्हु ने नहीं किया,उन्होंनेसिवाये इसके कि (अल्लाह न करे) वह गुमराह हो गए हों (जबकी
ऐसा नहीं हुआ) l
23) حَدَّثَنَا عَمْرٌو النَّاقِدُ، حَدَّثَنَا
سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ هِشَامِ بْنِ حُجَيْرٍ، عَنْ طَاوُسٍ، قَالَ:
«أُتِيَ ابْنُ عَبَّاسٍ بِكِتَابٍ فِيهِ قَضَاءُ عَلِيٍّ رَضِيَ اللهُ عَنْهُ،
فَمَحَاهُ إِلَّا قَدْرَ»، وَأَشَارَ سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ بِذِرَاعِهِ
23) ताऊस
से रिवायत है, कहा: हज़रत इब्ने
अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा के पास एक किताब लायी गयी जिसमे हज़रत अली रज़ियल्लाहू अन्हु के फ़ैसले (लिखे हुए) थे तो उन्होंने इतना छोड़ कर बाक़ी (सब कुछ) मिटा दिया और सुफ़ियान बिन उयैय्ना ने हाथ जितनी लम्बाई का इशारा किया (हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा के मुताबिक़ पूरी किताब में से इतनी ही तहरीर सही थी, बाक़ी सब झूट था) l
24) حَدَّثَنَا حَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ الْحُلْوَانِيُّ،
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ، حَدَّثَنَا ابْنُ إِدْرِيسَ، عَنِ الْأَعْمَشِ،
عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، قَالَ: " لَمَّا أَحْدَثُوا تِلْكَ الْأَشْيَاءَ
بَعْدَ عَلِيٍّ رَضِيَ اللهُ عَنْهُ، قَالَ رَجُلٌ مِنْ أَصْحَابِ عَلِيٍّ:
قَاتَلَهُمُ اللهُ، أَيَّ عِلْمٍ أَفْسَدُوا
24) अबू
इसहाक़ से रिवायत है, कहा: जब (बज़ाहिर हज़रत अली का नाम लेने वाले) लोगो
ने हज़रत अली रज़ियल्लाहू अन्हु के बाद (उनके नाम पर) यह चीज़ें एजाद कर ली तो उनके साथियों में से एक शख़स ने कहा: अल्लाह इन लोगो को क़त्ल करे! इन्होने कैसा बड़ा इल्म बिगाड़ दिया l
25) حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ خَشْرَمٍ، أَخْبَرَنَا
أَبُو بَكْرٍ يَعْنِي ابْنَ عَيَّاشٍ، قَالَ: سَمِعْتُ الْمُغِيرَةَ، يَقُولُ: لَمْ يَكُنْ يَصْدُقُ عَلَى عَلِيٍّ رَضِيَ اللهُ عَنْهُ فِي الْحَدِيثِ عَنْهُ
إِلَّا مِنْ أَصْحَابِ عَبْدِ اللهِ بْنِ مَسْعُودٍ
25) हज़रत मुगीरा रज़ियल्लाहू
अन्हु फ़रमाते थे: हज़रत अली रज़ियल्लाहू अन्हु से मरवी हदीसो में किसी चीज़ के सच
होने को नहीं माना जाता था सिवाए उसके जो अब्दुल्लाह बिन मसूद रज़ियल्लाहू अन्हु के
शागिर्दों से रिवायत की गयी हो l
26) حَدَّثَنَا حَسَنُ بْنُ الرَّبِيعِ، حَدَّثَنَا
حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ أَيُّوبَ، وَهِشَامٍ، عَنْ مُحَمَّدٍ، وَحَدَّثَنَا
فُضَيْلٌ، عَنْ هِشَامٍ قَالَ: وَحَدَّثَنَا مَخْلَدُ بْنُ
حُسَيْنٍ، عَنْ هِشَامٍ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ، قَالَ: إِنَّ هَذَا
الْعِلْمَ دِينٌ، فَانْظُرُوا عَمَّنْ تَأْخُذُونَ دِينَكُمْ
26) मुहम्मद बिन
सिरीन ने कहा: यह इल्म दीन है, इसलिए अच्छी तरह देख लो कि तुम किन लोगो से अपना
दीन ले रहे हो l