تَأْوِيلُ قَوْلِهِ عَزَّ وَجَلَّ: {إِذَا قُمْتُمْ إِلَى الصَّلَاةِ فَاغْسِلُوا وُجُوهَكُمْ وَأَيْدِيَكُمْ إِلَى الْمَرَافِقِ} المائدة: 6
बाब 1 :- अल्लाह तआला के फ़रमान : "जब तुम नमाज़ के लिए उठो तो अपने चेहरे और अपने हाथों को कोहनियों तक धोओ" की तफ़सीर
١) أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ قَالَ: حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ الزُّهْرِيِّ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُمَّ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: إِذَا اسْتَيْقَظَ أَحَدُكُمْ مِنْ نَوْمِهِ، فَلَا يَغْمِسْ يَدَهُ فِي وَضُوئِهِ حَتَّى يَغْسِلَهَا ثَلَاثًا، فَإِنَّ أَحَدَكُمْ لَا يَدْرِي أَيْنَ بَاتَتْ يَدُهُ
1) हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया : "जब तुम में से कोई नींद से जागे तो अपना हाथ वुज़ू के पानी में न डाले जब तक उसे तीन बार धो न ले क्यूंकि तुममें से कोई नहीं जानता कि उसके हाथ ने रात कहाँ गुज़ारी है (रात भर कहाँ कहाँ लगता रहा है)l"
तख़रीज :- मुस्लिम (643), इब्ने माजा (393), बुख़ारी (162), अबू दावूद (103)
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