سورة الناس
بِسْمِ اللّٰهِ
الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ
“अल्लाह के नाम से जो बेहद रहम वाला, निहायत
मेहरबान है l”
قُلْ
اَعُوْذُ بِرَبِّ النَّاسِۙ۱مَلِكِ النَّاسِۙ۲اِلٰهِ
النَّاسِۙ۳مِنْ
شَرِّ الْوَسْوَاسِ ۙ۬ الْخَنَّاسِ۪ۙ۴ الَّذِیْ
یُوَسْوِسُ فِیْ صُدُوْرِ النَّاسِۙ۵مِنَ الْجِنَّةِ وَ النَّاسِ۠۶
“तू कह मैं पनाह पकड़ता हूँ लोगो के रब की l
लोगों के बादशाह की l लोगो के माबूद की l वसवसा डालने वाले के शर से जो, हट हट कर
आने वाला है l वो जो लोगों के सीनों में वसवसा डालता है l जिन्नों और इंसानों में
से l”
अल्लाह तआला ने फ़रमाया, ऐ
मेरे नबी! आप कह दीजिये कि मैं लोगो के रब की जनाब में लोगो के हक़ीक़ी बादशाह की
जनाब में, लोगों के अकेले माबूद की जनाब में पनाह लेता हूँ लोगो के सीनों में
वस्वसा पैदा करने शैतान के शर से l उस शैतान की सिफ़त यह है कि आदमी जब अपने रब की
याद से गाफ़िल होता है तो वो उसके दिल में वस्वसा पैदा करता है और जब गफ़लत से
चौकन्ना होता है और अपने रब को याद करता है तो वो शैतान फ़ौरन पीछे हट जाता है और
छुप जाता है l वो शैतान जिन्नों में से भी होता है और इंसानों में से भी l इरशाद
फ़रमाया :
وَ اِمَّا یَنْزَغَنَّكَ مِنَ الشَّیْطٰنِ نَزْغٌ
فَاسْتَعِذْ بِاللّٰهِ ؕ اِنَّهٗ سَمِیْعٌ عَلِیْمٌ
“और अगर कभी शैतान की तरफ़
से कोई उकसाहट तुझे उभार ही दे तो अल्लाह की पनाह तलब कर, बेशक वो सब कुछ सुनने
वाला, सब कुछ जानने वाला है l” [आराफ़ :
200]
مِنْ شَرِّ الْوَسْوَاسِ ۙ۬ الْخَنَّاسِ : सय्यदना अबू
हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने
फ़रमाया : “जब नमाज़ के लिए आज़ान होती है तो शैतान
गौज़ (हवा ख़ारिज करते हुए) मारता हुआ तेज़ी के साथ पीठ मोड़ कर दूर भाग जाता है, ताकि
वो आज़ान की आवाज़ न सुन सके और जब आज़ान मुकम्मल हो जाती है तो वापस आ जाता है,
लेकिन जब नमाज़ के लिए इक़ामत होती है, तो वो फ़िर पीठ मोड़ कर भाग जाता है l जब इक़ामत
मुकम्मल होती है तो वापस आकर आदमी के दिल में ख़यालात डालना शुरू कर देता है l कहता
है कि फ़ला चीज़ याद कर, फ़ला चीज़ याद कर, वो चीज़ें जो उसे याद नहीं थीं, यहाँ तक कि आदमी की हालत यह हो जाती है कि उसे यह भी मालूम नहीं
होता कि उसने कितनी नमाज़ पढ़ी?” [बुख़ारी :
608]
सय्यदना अली बिन
हुसैन रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं कि उम्मुल मोमिनीन सय्यदह साफिया
रज़ियल्लाहू अन्हा ने उनको ख़बर दी कि वो रमज़ान के आख़िरी अशरे में जब रसूले करीम
सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एतिकाफ़ में बैठे हुए थे, आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से
मिलने मस्जिद में आयीं, थोड़ी देर तक बातें कीं, फ़िर वापस होने के लिए खड़ी हुयीं तो
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम भी उनके साथ खड़े हुए, जब मस्जिद के दरवाज़े के
क़रीब पहुंचे, जहाँ उम्मुल मोमिनीन उम्मे सलमा रज़ियल्लाहू अन्हा का दरवाज़ा था, तो
वहां दो अंसारी सहाबी मिले l उन्होंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को सलाम
किया और तेज़ी से आगे गुज़र गए, आपने फ़रमाया : “ज़रा
ठहर जाओ, यह (मेरी बीवी) सफ़िया बिन्ते हुयय हैं l” वो कहने लगे, सुबहानल्लाह ! या रसूलुल्लाह ! आपका
यह फ़रमाना उन पर भारी गुज़रा l आपने फ़रमाया : “शैतान
आदमी के जिस्म में ख़ून की तरह दौड़ता रहता है, मैं डरा कि कहीं तुम्हारे दिन में
कोई वस्वसा न डाल दे l” [बुख़ारी : 2035,
मुस्लिम : 5679]
सय्यदना जाबिर
बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि
वसल्लम ने फ़रमाया: “इब्लीस अपना तख़्त पानी पर रखता
है, फ़िर अपनी फ़ौज का एक हिस्सा रवाना करता है, तो उनमें से मर्तबे के लिहाज़ से
उसके सबसे ज़्यादा क़रीब वो होता है जो उनमें से सबसे बड़ा फ़ितना फैलता है l उनमें से
एक आता है और कहता है, मैंने यह किया वो किया l इब्लीस कहता है, तूने कुछ नहीं
कियाl फ़िर उनमें से कोई आता है और कहता है, मैंने आदमी को उस वक़्त तक नहीं छोड़ा जब
तक कि उसके और उसकी बीवी के बीच जुदाई न करा दी, तो इब्लीस उसको अपने क़रीब करता
है, उसे गले से लगाता है और कहता है, हाँ तूने (वाक़ई बहुत बड़ा) कारनामा किया l”
[मुस्लिम : 7106]
सय्यदना
अब्दुल्लाह बिन मसूद रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु
अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “तुम में से हर शख़्स के
साथ अल्लाह तआला ने जिन्नों में से उसका एक साथी (यानी एक शैतान) बना रखा है l” लोगो ने कहा, ऐ अल्लाह के रसूल! क्या आपके साथ भी?
आपने फ़रमाया: “हाँ! लेकिन अल्लाह तआला ने उसके
मुक़ाबले में मेरी मदद फ़रमाई है, सो वो मेरा फ़रमाबरदारहो गया है, इसलिए वो मुझे
नेकी और अच्छाई ही कहता रहता है l” [मुस्लिम
: 7108]
शैतान इन्सान के
दिल पर डेरा डाले रखता है, जब इंसान गुनाह और गफ़लत में शामिल हो जाये तो वो वस्वसा
पैदा करने लग जाता है और जब इन्सान अल्लाह तआला का ज़िक्र करने लग जाये तो वो पीछे
हट जाता है l इन वस्वसो पर अगर अमल न किया जाये तो इस पर पकड़ नहीं हैं, सय्यदना अबू
हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने
फ़रमाया: “बेशक अल्लाह तआला ने मेरे लिए मेरी उम्मत
के सीनों में पैदा होने वाले वस्वसे माफ़ कर दिए हैं l जब तक वो (उन पर) अमल न
करें, या मुंह से न निकाले l” [बुख़ारी
: 2528, मुस्लिम : 332]
सय्यदना अबू
हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने
फ़रमाया : “शैतान तुम में से किसी एक के पास आता है
और उससे कहता है, यह चीज़ किसने पैदा की? वो किसने पैदा की? यहाँ तक कि वो कहता है,
अल्लाह को किसने पैदा किया? जो जब शैतान किसी शख़्स के दिल में ऐसा वस्वसा डाले तो
ऐसे शख़्स को चाहिए कि वो फ़ौरन अल्लाह तआला से पनाह मांगे और शैतानी ख़याल से बाज़
रहे l” [बुख़ारी : 3276, मुस्लिम 345]
सय्यदना अबू
हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने
फ़रमाया: “लोग हमेशा एक दुसरे से पूछते रहेंगें (कि
फ़ला चीज़ किसने पैदा की, फ़ला चीज़ किसने पैदा की) यहाँ तक कि कहा जायेगा, अल्लाह ने
तो सब को पैदा किया, अल्लाह को किसने पैदा किया? तो जो कोई इस क़िस्म का वस्वसा दिल
में पाए तो कहे : {{ آمَنْتُ بِاللهِ }}
“मैं अल्लाह पर ईमान लाया
l” [मुस्लिम : 343]
सय्यदना जाबिर
बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि
वसल्लम ने फ़रमाया: “जब तुम में से किसी को कोई औरत
अच्छी लगे और उसका ख़याल दिल में आये तो उसे चाहिए कि अपनी बीवी के पास आये, उससे
सोहबत करे, क्यूंकि ऐसा करने से उसके दिल का ख़याल ख़तम हो जायेगा l” [मुस्लिम : 3409]
مِنَ الْجِنَّةِ وَ النَّاسِ : यानी जिनके दिलों
में शैतान वस्वसे डालता है, वो जिन भी हैं और इन्सान भी lयह भी कहा गया है कि जो
लोगो के दिलों में वसवसे डालते हैं वो शैतान इन्सानों और जिन्नों दोनों में से
हैं, जैसा कि इरशाद फ़रमाया:
وَ كَذٰلِكَ جَعَلْنَا لِكُلِّ نَبِیٍّ عَدُوًّا شَیٰطِیْنَ
الْاِنْسِ وَ الْجِنِّ یُوْحِیْ بَعْضُهُمْ اِلٰی بَعْضٍ زُخْرُفَ الْقَوْلِ
غُرُوْرًا ؕ وَ لَوْ شَآءَ رَبُّكَ مَا فَعَلُوْهُ فَذَرْهُمْ وَ مَا
یَفْتَرُوْنَ
“और उसी तरह हमने हर नबी के लिए इन्सानों और जिन्नों के
शैतानों को दुश्मन बना दिया, वो एक दुसरे को पुर फ़रेब बातें सिखाते हैं धोका देने
के लिए और अगर तेरा रब चाहता तो वो ऐसा न करते, तो छोड़ उन्हें और जो वो झूट घड़ते
हैं l” [अनआम
: 112]
और फ़रमाया:
وَ
لَقَدْ خَلَقْنَا الْاِنْسَانَ وَ نَعْلَمُ مَا تُوَسْوِسُ بِهٖ نَفْسُهٗ ۖۚ وَ
نَحْنُ اَقْرَبُ اِلَیْهِ مِنْ حَبْلِ الْوَرِیْدِ
“और बिलाशुबा यक़ीनन
हमने इन्सान को पैदा किया और हम उन चीज़ों को जानते हैं जिनका वस्वसा उसका नफ़्स
डालता है और हम उसकी रगे जां से भी ज़्यादा उसके क़रीब हैं l” [क़ाफ़ : 16]
सय्यदना
अब्दुल्लाह बिन मसूद रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु
अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया : “तुममें से हर शख़्स के
साथ अल्लाह तआला ने उसका एक साथी जिन्नों में और उसका एक साथी फरिश्तों में से
मुक़र्रर कर दिया हैl” [मुस्लिम : 7109]
सय्यदना
अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं कि एक आदमी नबी
सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में आया और कहने लगा, ऐ अल्लाह के रसूल! हमारे
दिल में कुछ ख़यालात आते हैं और वो इशारे किनारे से कुछ इस तरह कह रहा था कि उन
ख़यालात को ज़बान पर लाने के बजाये कोयला हो जाना उसे ज़्यादा पसंद है, तो रसूलुल्लाह
सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “अल्लाहु
अकबर, अल्लाहु अकबर तारीफ़ उस अल्लाह की जिसने उस (इब्लीस) के मक्र को वस्वसे की
तरफ़ लौटा दिया l” [अबू दावूद : 5112,
सुनन कुबरा नसाई : 10504]