Hadees in hindi

Friday, December 18, 2020

 مُقَدّمَة                                                                                    मुक़दमा 

 

١) عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: إِنَّمَا الْأَعْمَال بِالنِّيَّاتِ وَإِنَّمَا لكل امْرِئ مَا نَوَى فَمَنْ كَانَتْ هِجْرَتُهُ إِلَى اللَّهِ وَرَسُولِهِ فَهِجْرَتُهُ إِلَى اللَّهِ وَرَسُولِهِ وَمَنْ كَانَتْ هِجْرَتُهُ إِلَى دُنْيَا يُصِيبُهَا أَوِ امْرَأَةٍ يَتَزَوَّجُهَا فَهجرَته إِلَى مَا هَاجر إِلَيْهِ

[1] उमर बिन ख़त्ताब रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “तमाम आमाल का दारोमदार नियतो पर है, हर शख़्स को वही कुछ मिलेगा जो उसने नियत की है, तो जिस शख़्स की हिजरत अल्लाह और उसके रसूल के लिए हुई तो उसकी हिजरत अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लिए है और जिसकी हिजरत दुनिया कमाने या किसी औरत से शादी करने के लिए हुई तो उसकी हिजरत उसके लिए है जिसके लिए उसने हिजरत की”

तख़रीज: मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (1,54,2529,3898,5070,6689,6953), मुस्लिम (4927)


Monday, October 28, 2019

1 الطَّهَارَةِ عَنْ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ किताब : तहारत के अहकाम ओ मसाइल

بَابُ مَا جَاءَ أَنَّ مِفْتَاحَ الصَّلَاةِ الطُّهُورُ
बाब 3: वुज़ू नमाज़ की कुंजी है 

٣) حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، وَهَنَّادٌ، وَمَحْمُودُ بْنُ غَيْلَانَ، قَالُوا: حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ سُفْيَانَ، ح وحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ قَالَ: حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ قَالَ: حَدَّثَنَا [ص:9] سُفْيَانُ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَقِيلٍ، عَنْ مُحَمَّدِ ابْنِ الْحَنَفِيَّةِ، عَنْ عَلِيٍّ، عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، قَالَ: «مِفْتَاحُ الصَّلَاةِ الطُّهُورُ، وَتَحْرِيمُهَا التَّكْبِيرُ، وَتَحْلِيلُهَا التَّسْلِيمُ». هَذَا الْحَدِيثُ أَصَحُّ شَيْءٍ فِي هَذَا الْبَابِ وَأَحْسَنُ. وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ عَقِيلٍ هُوَ صَدُوقٌ، وَقَدْ تَكَلَّمَ فِيهِ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ قِبَلِ حِفْظِهِ. وسَمِعْت مُحَمَّدَ بْنَ إِسْمَاعِيلَ، يَقُولُ: كَانَ أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَالْحُمَيْدِيُّ، يَحْتَجُّونَ بِحَدِيثِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَقِيلٍ، قَالَ مُحَمَّدٌ: وَهُوَ مُقَارِبُ الْحَدِيثِ. وَفِي الْبَابِ عَنْ جَابِرٍ، وَأَبِي سَعِيدٍ


3) अली रज़ियल्लाहू अन्हु कहते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “नमाज़ की कुंजी वुज़ू है और उसकी तहरीम अल्लाहु अकबर कहना है (यानी अल्लाहु अकबर कह कर नमाज़ में दाख़िल होने से वह सारे काम हराम होते हैं जिन्हें अल्लाह ने नमाज़ में हराम किया है) और नमाज़ में जो चीज़ें हराम थीं, वह अस्सलामु अलैकुम (सलाम फेरने से) कहने ही से हलाल होती हैं l”
इमाम तिरमिज़ कहते हैं: इस बाब में यह हदीस सबसे सहीह और हसन है l अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद बिन अक़ील सुदूक़ हैं, बाज़ अहले इल्म ने उनके हाफ़िज़े के बारे में उन पर कलाम किया है, मैंने मुहम्मद बिन इस्माईल बुख़ारी को यह कहते हुए सुना कि अहमद बिन हम्बल, इसहाक़ बिन इब्राहीम और हुमैदी: अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद बिन अक़ील की रिवायत से हुज्जत पकड़ते थे और वह मक़ारबुल हदीस (इसका मतलब दूसरों की हदीस इसकी हदीस से क़रीब है) हैं l इस बाब में जाबिर और अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहू अन्हुमा से भी हदीसें आई हैं l
तहकीम :
ज़ुबैर अली ज़ई:- हसन
शेख़ अलबानी:- हसन सहीह  
शुऐब अरनऊत :- सहीह लिग़ेरिह
तख़रीज : सुनन अबू दावूद (61), इब्ने माजा (275)

Sunday, October 27, 2019

1 - كِتَاب الطَّهَارَةِ तहारत के अहकाम ओ मसाइल


بَابُ مَا يَقُولُ الرَّجُلُ إِذَا دَخَلَ الْخَلَاءَ
बाब 3: आदमी बैतुल ख़ला में जाना चाहे तो क्या पढ़े ?

٤) حَدَّثَنَا مُسَدَّدُ بْنُ مُسَرْهَدٍ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، وَعَبْدُ الْوَارِثِ، عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ صُهَيْبٍ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ: كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا دَخَلَ الْخَلَاءَ قَالَ: عَنْ حَمَّادٍ قَالَ: «اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ» وَقَالَ: عَنْ عَبْدِ الْوَارِثِ قَالَ: «أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الْخُبُثِ وَالْخَبَائِثِ»

قَالَ أَبُو دَاوُدَ: رَوَاهُ شُعْبَةُ، عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ: " اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ "، وَقَالَ مَرَّةً: " أَعُوذُ بِاللَّهِ "، وَقَالَ وُهَيْبٌ: " فَلْيَتَعَوَّذْ بِاللَّهِ ".


4) हज़रत अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहू अन्हु रिवायत करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब बैतुल ख़ला में जाने का इरादा करते तो यह दुआ पढ़ते... हम्माद बिन ज़ैद के अल्फ़ाज़ हैं: [اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْخُبُثِ وَالْخَبَائِثِ] और अब्दुल वारिस के अल्फ़ाज़ हैं: [أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الْخُبُثِ وَالْخَبَائِثِ] “ऐ अल्लाह! मैं ख़बीस जिन्नों और जिन्नियों से तेरी पनाह में आता हूँl” इमाम अबू दावूद रहमतुल्लाह अलैह कहते हैं कि शोबा अब्दुल अज़ीज़ से [اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ...] के अल्फ़ाज़ कहें हैं जबकि उन्होंने एक बार [أَعُوذُ بِاللَّهِ...] के अल्फ़ाज़ भी बयान किये l
इमाम अबू दावूद कहते हैं कि वुहैब से [فَلْيَتَعَوَّذْ بِاللَّهِ] “उसे अल्लाह की पनाह लेनी चाहिए l” के अल्फ़ाज़ कहें हैं l

तख़रीज : सही बुख़ारी (142), सही मुस्लिम (831), सुनन नसाई (19), सुनन तिरमिज़ी (6), इब्ने माजा (298)

Saturday, October 26, 2019

1 - كِتَابُ الْإِيمَانَ ईमान के अहकाम व मसाइल

الإسلام مَا هُوَ وَبَيَانُ خِصَالِهِ

इस्लाम की हक़ीक़त और उसकी ख़ूबियाँ


٩٩) حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ عُمَارَةَ وَهُوَ ابْنُ الْقَعْقَاعِ، عَنْ أَبِي زُرْعَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «سَلُونِي»، فَهَابُوهُ أَنْ يَسْأَلُوهُ، فَجَاءَ رَجُلٌ، فَجَلَسَ عِنْدَ رُكْبَتَيْهِ، فَقَالَ: يَا رَسُولَ اللهِ، مَا الْإِسْلَامُ؟ قَالَ: «لَا تُشْرِكُ بِاللهِ شَيْئًا، وَتُقِيمُ الصَّلَاةَ، وَتُؤْتِي الزَّكَاةَ، وَتَصُومُ رَمَضَانَ»، قَالَ: صَدَقْتَ، قَالَ: يَا رَسُولَ اللهِ، مَا الْإِيمَانُ؟ قَالَ: «أَنْ تُؤْمِنَ بِاللهِ، وَمَلَائِكَتِهِ، وَكِتَابِهِ، وَلِقَائِهِ، وَرُسُلِهِ، وَتُؤْمِنَ بِالْبَعْثِ، وَتُؤْمِنَ بِالْقَدَرِ كُلِّهِ»، قَالَ: صَدَقْتَ، قَالَ: يَا رَسُولَ اللهِ، مَا الْإِحْسَانُ؟ قَالَ: «أَنْ تَخْشَى اللهَ كَأَنَّكَ تَرَاهُ، فَإِنَّكَ إِنْ لَا تَكُنْ تَرَاهُ فَإِنَّهُ يَرَاكَ»، قَالَ: صَدَقْتَ. قَالَ: يَا رَسُولَ اللهِ، مَتَى تَقُومُ السَّاعَةُ؟ قَالَ: " مَا الْمَسْئُولُ عَنْهَا بِأَعْلَمَ مِنَ السَّائِلِ، وَسَأُحَدِّثُكَ عَنْ أَشْرَاطِهَا: إِذَا رَأَيْتَ الْمَرْأَةَ تَلِدُ رَبَّهَا، فَذَاكَ مِنْ أَشْرَاطِهَا، وَإِذَا رَأَيْتَ الْحُفَاةَ الْعُرَاةَ الصُّمَّ الْبُكْمَ مُلُوكَ الْأَرْضِ، فَذَاكَ مِنْ أَشْرَاطِهَا، وَإِذَا رَأَيْتَ رِعَاءَ الْبَهْمِ يَتَطَاوَلُونَ فِي الْبُنْيَانِ، فَذَاكَ مِنْ أَشْرَاطِهَا فِي خَمْسٍ مِنَ الْغَيْبِ لَا يَعْلَمُهُنَّ إِلَّا اللهُ "، ثُمَّ قَرَأَ: {إِنَّ اللهَ عِنْدَهُ عِلْمُ السَّاعَةِ وَيُنَزِّلُ الْغَيْثَ وَيَعْلَمُ مَا فِي الْأَرْحَامِ وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ مَاذَا تَكْسِبُ غَدًا وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ بِأَيِّ أَرْضٍ تَمُوتُ إِنَّ اللهِ عَلِيمٌ خَبِيرٌ} [لقمان: 34] قَالَ: ثُمَّ قَامَ الرَّجُلُ، فَقَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «رُدُّوهُ عَلَيَّ»، فَالْتُمِسَ، فَلَمْ يَجِدُوهُ، فَقَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «هَذَا جِبْرِيلُ، أَرَادَ أَنْ تَعَلَّمُوا إِذْ لَمْ تَسْأَلُوا»


99) हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “मुझसे (दीन के बारे में) पूछ लो l” सहाबा किराम आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की हैबत की वजह से पूछ न सके, तब एक आदमी आया और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दोनों घुटनों के क़रीब बैठ गया, फिर कहने लगा: ऐ अल्लाह के रसूल! इस्लाम क्या है? आपने फ़रमाया: “तुम अल्लाह तआला के साथ किसी को शरीक न करो, नमाज़ क़ायम करो, ज़कात अदा करो और रमज़ान के रोज़े रखो l” उसने कहा: आपने सच कहा l फिर पुछा: ऐ अल्लाह के रसूल! ईमान क्या है? आपने फ़रमाया: “यह कि तुम अल्लाह तआला, उसके फ़रिशतों, उसकी किताब, (क़यामत के दिन) उससे मुलाक़ात और उसके रसूलों पर ईमान लाओ, मरने के बाद उठने पर ईमान लाओ और तक़दीर पर ईमान लाओ l” उसने कहा: आपने सच कहा l फिर कहने लगा: ऐ अल्लाह के रसूल! इहसान क्या है? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “तुम अल्लाह तआला से इस तरह डरो जैसे तुम उसे देख रहे हो और अगर तुम उसे नहीं देख रहे हो तो वह यक़ीनन तुम्हें देख रहा है l” उसने कहा: आपने सच कहा, फिर पुछा: ऐ अल्लाह के रसूल! क़यामत कब होगी? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जिससे क़यामत के बारे में सवाल किया गया है, वह इसके बारे में पूछने वाले से ज़्यादा नहीं जानता, लेकिन मैं तुम्हें क़यामत की निशानियाँ बता देता हूँ: जब औरत अपना मालिक जनेगी तो यह उसकी निशानियों में से है, जब नंगे पैर वाले और नंगे बदन, गूंगे और बहरे ज़मीन के बादशाह हैं तो यह उसकी निशानियों में से है और जब भेड़ बकरियां चराने वाले, ऊंचीं ऊंचीं इमारतें बनाने में एक दुसरे से मुक़ाबला करेंगें तो यह उसकी निशानियों में से है, यह (क़यामत के वक़्त का इल्म) ग़ैब की उन पांच चीज़ों में से है जिन्हें अल्लाह तआला के सिवा कोई नहीं जानता l” फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यह आयत पढ़ी: “बेशक अल्लाह तआला ही के पास क़यामत का इल्म है, वही बारिश बरसाता है और वही जानता है कि माओं के पेटों में क्या है, कोई जान नहीं जानती कि वह कल क्या करेगी, न किसी नफ़्स को यह मालूम है कि वह ज़मीन के किस हिस्से में मरेग......l” सूरत के आख़िर तक (हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु ने) कहा: फिर वह आदमी वापस चला गया तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “उस आदमी को मेरे पास वापस लाओ l” सहाबा किराम उसे वापस लाने के लिए भाग दौड़ करने लगे तो उन्हें कुछ नज़र न आया, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “यह जिब्रील अलैहिस्सलाम थे जो लोगों को उनका दीन सिखाने आये थे l”

तख़रीज : सही बुख़ारी (50), सुनन अबू दावूद (4698), सुनन नसाई (4994), इब्ने माजा (64)

Sunday, October 20, 2019

1 كتاب السنة सुन्नत की अहमियत और फ़ज़ीलत

بَابُ اتِّبَاعِ سُنَّةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

बाब 1 :- सुन्नते रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पैरवी का बयान


٣) حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ قَالَ: حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، وَوَكِيعٌ، عَنِ الْأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «مَنْ أَطَاعَنِي فَقَدْ أَطَاعَ اللَّهَ، وَمَنْ عَصَانِي فَقَدْ عَصَى اللَّهَ»

3) हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जिसने मेरी इताआत की उसने अल्लाह की इताआत की और जिसने मेरी नाफ़रमानी की उसने अल्लाह की नाफ़रमानी की l”

तख़रीज : सही बुख़ारी (7137), सही मुस्लिम (4747),  सुनन नसाई (4198)

Thursday, October 17, 2019

1 - كِتَاب الطَّهَارَةِ तहारत के अहकाम ओ मसाइल

بَابُ الرَّجُلِ يَتَبَوَّأُ لِبَوْلِهِ
बाब 2: पेशाब के लिए (नरम) जगह तलाश करना

٣) حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، أَخْبَرَنَا أَبُو التَّيَّاحِ، قَالَ: حَدَّثَنِي شَيْخٌ، قَالَ لَمَّا قَدِمَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبَّاسٍ الْبَصْرَةَ، فَكَانَ يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي مُوسَى، فَكَتَبَ عَبْدُ اللَّهِ إِلَى أَبِي مُوسَى يَسْأَلُهُ عَنْ أَشْيَاءَ، فَكَتَبَ إِلَيْهِ أَبُو مُوسَى: إِنِّي كُنْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَاتَ يَوْمٍ فَأَرَادَ أَنْ يَبُولَ، فَأَتَى دَمِثًا فِي أَصْلِ جِدَارٍ فَبَالَ، ثُمَّ قَالَ: صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ «إِذَا أَرَادَ أَحَدُكُمْ أَنْ يَبُولَ فَلْيَرْتَدْ لِبَوْلِهِ مَوْضِعًا»


3) अबू तय्याह कहते हैं कि मुझे एक शेख़ ने बताया कि हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा जब बसरा में (गवर्नर की हैसियत से) तशरीफ़ लाये तो लोग उन्हें हज़रत अबू मूसा अशअरी रज़ियल्लाहू अन्हु से सुनी हुई हदीसें बयान करते थे....(तो इस बारे में) हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा ने हज़रत अबू मूसा रज़ियल्लाहू के नाम एक ख़त लिखा जिसमें उनसे कुछ मसाइल पूछे तो हज़रत अबू मूसा रज़ियल्लाहू अन्हु ने उन्हें जवाब में लिखा: मैं एक दिन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ था, तो आपने पेशाब करने का इरादा किया, तो आप एक दीवार की जड़ में नरम मिट्टी के पास आये और पेशाब किया l इसके बाद आपने फ़रमाया: “तुममें से जब कोई पेशाब करना चाहे तो उसके लिए (मुनासिब नरम) जगह तलाश कर लिया करे l”
तह्कीम : ज़ुबैर अली ज़ई:- ज़ईफ़
        शेख़ अलबानी:- ज़ईफ़
        शोएब अरनऊत:- ज़ईफ़

1 - كِتَابُ الْإِيمَانَ ईमान के अहकाम व मसाइल


الْإِيمَانُ مَا هُوَ وَبَيَانُ خِصَالِهِ

ईमान क्या है? और उसकी ख़सलतों का बयान 


٩٧) وحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، جَمِيعًا عَنِ ابْنِ عُلَيَّةَ، قَالَ زُهَيْرٌ: حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ أَبِي حَيَّانَ، عَنْ أَبِي زُرْعَةَ بْنِ عَمْرِو بْنِ جَرِيرٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ: كَانَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمًا بَارِزًا لِلنَّاسِ، فَأَتَاهُ رَجُلٌ، فَقَالَ: يَا رَسُولُ اللهِ، مَا الْإِيمَانُ؟ قَالَ: «أَنْ تُؤْمِنَ بِاللهِ، وَمَلَائِكَتِهِ، وَكِتَابِهِ، وَلِقَائِهِ، وَرُسُلِهِ، وَتُؤْمِنَ بِالْبَعْثِ الْآخِرِ»، قَالَ: يَا رَسُولَ اللهِ، مَا الْإِسْلَامُ؟ قَالَ: «الْإِسْلَامُ أَنْ تَعْبُدَ اللهَ، وَلَا تُشْرِكَ بِهِ شَيْئًا، وَتُقِيمَ الصَّلَاةَ الْمَكْتُوبَةَ، وَتُؤَدِّيَ الزَّكَاةَ الْمَفْرُوضَةَ، وَتَصُومَ رَمَضَانَ» قَالَ: يَا رَسُولَ اللهِ، مَا الْإِحْسَانُ؟ قَالَ: «أَنْ تَعْبُدَ اللهَ كَأَنَّكَ تَرَاهُ، فَإِنَّكَ إِنْ لَا تَرَاهُ فَإِنَّهُ يَرَاكَ»، قَالَ: يَا رَسُولَ اللهَ، مَتَى السَّاعَةُ؟ قَالَ: " مَا الْمَسْئُولُ عَنْهَا بِأَعْلَمَ مِنَ السَّائِلِ، وَلَكِنْ سَأُحَدِّثُكَ عَنْ أَشْرَاطِهَا: إِذَا وَلَدَتِ الْأَمَةُ رَبَّهَا، فَذَاكَ مِنْ أَشْرَاطِهَا، وَإِذَا كَانَتِ الْعُرَاةُ الْحُفَاةُ رُءُوسَ النَّاسِ، فَذَاكَ مِنْ أَشْرَاطِهَا، وَإِذَا تَطَاوَلَ رِعَاءُ الْبَهْمِ فِي الْبُنْيَانِ، فَذَاكَ مِنْ أَشْرَاطِهَا فِي خَمْسٍ لَا يَعْلَمُهُنَّ إِلَّا اللهُ، ثُمَّ تَلَا صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: {إِنَّ اللهِ عِنْدَهُ عِلْمُ السَّاعَةِ وَيُنَزِّلُ الْغَيْثَ وَيَعْلَمُ مَا فِي الْأَرْحَامِ وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ مَاذَا تَكْسِبُ غَدًا وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ بِأَيِّ أَرْضٍ تَمُوتُ إِنَّ اللهَ عَلِيمٌ خَبِيرٌ} [لقمان: 34] " قَالَ: ثُمَّ أَدْبَرَ الرَّجُلُ، فَقَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «رُدُّوا عَلَيَّ الرَّجُلَ»، فَأَخَذُوا لِيَرُدُّوهُ، فَلَمْ يَرَوْا شَيْئًا، فَقَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «هَذَا جِبْرِيلُ جَاءَ لِيُعَلِّمَ النَّاسَ دِينَهُمْ»


97) हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक दिन लोगों के सामने बैठे थे, एक आदमी आपके पास आया और पुछा: ऐ अल्लाह के रसूल! ईमान क्या है? आपने फ़रमाया: “तुम अल्लाह तआला, उसके फ़रिशतों, उसकी किताब, (क़यामत के दिन) उससे मुलाक़ात और उसके रसूलों पर ईमान आओ और आख़िरी (बार जिंदा होकर) उठने पर (भी) ईमान ले आओ l” उसने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! इस्लाम क्या है? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “इस्लाम यह है कि अल्लाह तआला की इबादत करो और उसके साथ किसी चीज़ को शरीक न ठहराओ, फ़र्ज़ नमाज़ की पाबन्दी करो, फ़र्ज़ की गई ज़कात अदा करो और रमज़ान के रोज़े रखोl” उसने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! इहसान क्या है? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “अल्लाह तआला की इबादत इस तरह करो जैसे तुम देख रहे हो और अगर तुम उसे नहीं देख रहे हो तो वह यक़ीनन तुम्हें देख रहा है l” उसने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! क़यामत कब होगी? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जिससे सवाल किया गया है, वह इसके बारे में पूछने वाले से ज़्यादा नहीं जानता, लेकिन मैं तुम्हें क़यामत की निशानियाँ बता देता हूँ: जब लौंडी अपना मालिक जनेगी तो यह उसकी निशानियों में से है, और जब नंगे बदन और नंगे पैर वाले लोगों के सरदार बन जायेंगे तो यह उसकी निशानियों में से है और जब भेड़ बकरियां चराने वाले, ऊंचीं ऊंचीं इमारतें बनाने में एक दुसरे से मुक़ाबला करेंगें तो यह उसकी निशानियों में से है, (क़यामत के वक़्त का इल्म) उन पांच चीज़ों में से है जिन्हें अल्लाह तआला के सिवा कोई नहीं जानता l” फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यह आयत पढ़ी: “बेशक अल्लाह तआला ही के पास क़यामत का इल्म है, वही बारिश बरसाता है और वही जानता है कि माओं के पेटों में क्या है, कोई जान नहीं जानती कि वह कल क्या करेगी, न किसी नफ़्स को यह मालूम है कि वह ज़मीन के किस हिस्से में मरेगा, यक़ीनन अल्लाह तआला इल्म वाला ख़बरदार है l” (हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु ने) कहा: फिर वह आदमी वापस चला गया तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “उस आदमी को मेरे पास वापस लाओ l” सहाबा किराम उसे वापस लाने के लिए भाग दौड़ करने लगे तो उन्हें कुछ नज़र न आया, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “यह जिब्रील अलैहिस्सलाम थे जो लोगों को उनका दीन सिखाने आये थे l”

तख़रीज : सही बुख़ारी (50), सुनन अबू दावूद (4698), सुनन नसाई (4994), इब्ने माजा (64)

٩٨) حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللهِ بْنِ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ، حَدَّثَنَا أَبُو حَيَّانَ التَّيْمِيُّ، بِهَذَا الْإِسْنَادِ مِثْلَهُ، غَيْرَ أَنَّ فِي رِوَايَتِهِ: «إِذَا وَلَدَتِ الْأَمَةُ بَعْلَهَا» يَعْنِي السَّرَارِيَّ


98) (इब्ने उलय्या के बजाये) मुहम्मद बिन बशर ने कहा: हमें अबू हय्यान ने पिछली सनद से वही हदीस बयान की, लकिन उनकी रिवायत में: «إِذَا وَلَدَتِ الْأَمَةُ بَعْلَهَا» “जब लौंडी अपना मालिक जनेगीl”

तख़रीज : सही बुख़ारी (50), सुनन अबू दावूद (4698), सुनन नसाई (4994), इब्ने माजा (64)

  مُقَدّمَة                                                                                    मुक़दमा    ١) عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَض...