بَابُ التَّخَلِّي عِنْدَ قَضَاءِ الْحَاجَةِ
बाब 1 : क़ज़ा ए हाजत (पेशाब, पाखाना) के लिए लोगो से अलग और दूर होने का बयान
٢) حَدَّثَنَا مُسَدَّدُ بْنُ مُسَرْهَدٍ، حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ، أَخْبَرَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، «أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا أَرَادَ الْبَرَازَ انْطَلَقَ، حَتَّى لَا يَرَاهُ أَحَدٌ»
2) हज़रत जाबिर बिन
अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं: नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को जब
पेशाब, पखाने की हाजत होती तो (आबादी से) दूर चले जाते यहाँ तक कि आपको कोई न देख
सकता l
तख़रीज : इब्ने माजा (335)
तख़रीज : इब्ने माजा (335)
तह्कीम : ज़ुबैर अली ज़ई:- ज़ईफ़
अलबानी:- सहीह
शोएब:- सहीह लिग़ेरिह
Beshak.
ReplyDelete