Hadees in hindi

Thursday, October 17, 2019

1 - كِتَابُ الْإِيمَانَ ईमान के अहकाम व मसाइल


الْإِيمَانُ مَا هُوَ وَبَيَانُ خِصَالِهِ

ईमान क्या है? और उसकी ख़सलतों का बयान 


٩٧) وحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، جَمِيعًا عَنِ ابْنِ عُلَيَّةَ، قَالَ زُهَيْرٌ: حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ أَبِي حَيَّانَ، عَنْ أَبِي زُرْعَةَ بْنِ عَمْرِو بْنِ جَرِيرٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ: كَانَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمًا بَارِزًا لِلنَّاسِ، فَأَتَاهُ رَجُلٌ، فَقَالَ: يَا رَسُولُ اللهِ، مَا الْإِيمَانُ؟ قَالَ: «أَنْ تُؤْمِنَ بِاللهِ، وَمَلَائِكَتِهِ، وَكِتَابِهِ، وَلِقَائِهِ، وَرُسُلِهِ، وَتُؤْمِنَ بِالْبَعْثِ الْآخِرِ»، قَالَ: يَا رَسُولَ اللهِ، مَا الْإِسْلَامُ؟ قَالَ: «الْإِسْلَامُ أَنْ تَعْبُدَ اللهَ، وَلَا تُشْرِكَ بِهِ شَيْئًا، وَتُقِيمَ الصَّلَاةَ الْمَكْتُوبَةَ، وَتُؤَدِّيَ الزَّكَاةَ الْمَفْرُوضَةَ، وَتَصُومَ رَمَضَانَ» قَالَ: يَا رَسُولَ اللهِ، مَا الْإِحْسَانُ؟ قَالَ: «أَنْ تَعْبُدَ اللهَ كَأَنَّكَ تَرَاهُ، فَإِنَّكَ إِنْ لَا تَرَاهُ فَإِنَّهُ يَرَاكَ»، قَالَ: يَا رَسُولَ اللهَ، مَتَى السَّاعَةُ؟ قَالَ: " مَا الْمَسْئُولُ عَنْهَا بِأَعْلَمَ مِنَ السَّائِلِ، وَلَكِنْ سَأُحَدِّثُكَ عَنْ أَشْرَاطِهَا: إِذَا وَلَدَتِ الْأَمَةُ رَبَّهَا، فَذَاكَ مِنْ أَشْرَاطِهَا، وَإِذَا كَانَتِ الْعُرَاةُ الْحُفَاةُ رُءُوسَ النَّاسِ، فَذَاكَ مِنْ أَشْرَاطِهَا، وَإِذَا تَطَاوَلَ رِعَاءُ الْبَهْمِ فِي الْبُنْيَانِ، فَذَاكَ مِنْ أَشْرَاطِهَا فِي خَمْسٍ لَا يَعْلَمُهُنَّ إِلَّا اللهُ، ثُمَّ تَلَا صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: {إِنَّ اللهِ عِنْدَهُ عِلْمُ السَّاعَةِ وَيُنَزِّلُ الْغَيْثَ وَيَعْلَمُ مَا فِي الْأَرْحَامِ وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ مَاذَا تَكْسِبُ غَدًا وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ بِأَيِّ أَرْضٍ تَمُوتُ إِنَّ اللهَ عَلِيمٌ خَبِيرٌ} [لقمان: 34] " قَالَ: ثُمَّ أَدْبَرَ الرَّجُلُ، فَقَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «رُدُّوا عَلَيَّ الرَّجُلَ»، فَأَخَذُوا لِيَرُدُّوهُ، فَلَمْ يَرَوْا شَيْئًا، فَقَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «هَذَا جِبْرِيلُ جَاءَ لِيُعَلِّمَ النَّاسَ دِينَهُمْ»


97) हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक दिन लोगों के सामने बैठे थे, एक आदमी आपके पास आया और पुछा: ऐ अल्लाह के रसूल! ईमान क्या है? आपने फ़रमाया: “तुम अल्लाह तआला, उसके फ़रिशतों, उसकी किताब, (क़यामत के दिन) उससे मुलाक़ात और उसके रसूलों पर ईमान आओ और आख़िरी (बार जिंदा होकर) उठने पर (भी) ईमान ले आओ l” उसने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! इस्लाम क्या है? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “इस्लाम यह है कि अल्लाह तआला की इबादत करो और उसके साथ किसी चीज़ को शरीक न ठहराओ, फ़र्ज़ नमाज़ की पाबन्दी करो, फ़र्ज़ की गई ज़कात अदा करो और रमज़ान के रोज़े रखोl” उसने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! इहसान क्या है? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “अल्लाह तआला की इबादत इस तरह करो जैसे तुम देख रहे हो और अगर तुम उसे नहीं देख रहे हो तो वह यक़ीनन तुम्हें देख रहा है l” उसने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! क़यामत कब होगी? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जिससे सवाल किया गया है, वह इसके बारे में पूछने वाले से ज़्यादा नहीं जानता, लेकिन मैं तुम्हें क़यामत की निशानियाँ बता देता हूँ: जब लौंडी अपना मालिक जनेगी तो यह उसकी निशानियों में से है, और जब नंगे बदन और नंगे पैर वाले लोगों के सरदार बन जायेंगे तो यह उसकी निशानियों में से है और जब भेड़ बकरियां चराने वाले, ऊंचीं ऊंचीं इमारतें बनाने में एक दुसरे से मुक़ाबला करेंगें तो यह उसकी निशानियों में से है, (क़यामत के वक़्त का इल्म) उन पांच चीज़ों में से है जिन्हें अल्लाह तआला के सिवा कोई नहीं जानता l” फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यह आयत पढ़ी: “बेशक अल्लाह तआला ही के पास क़यामत का इल्म है, वही बारिश बरसाता है और वही जानता है कि माओं के पेटों में क्या है, कोई जान नहीं जानती कि वह कल क्या करेगी, न किसी नफ़्स को यह मालूम है कि वह ज़मीन के किस हिस्से में मरेगा, यक़ीनन अल्लाह तआला इल्म वाला ख़बरदार है l” (हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु ने) कहा: फिर वह आदमी वापस चला गया तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “उस आदमी को मेरे पास वापस लाओ l” सहाबा किराम उसे वापस लाने के लिए भाग दौड़ करने लगे तो उन्हें कुछ नज़र न आया, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “यह जिब्रील अलैहिस्सलाम थे जो लोगों को उनका दीन सिखाने आये थे l”

तख़रीज : सही बुख़ारी (50), सुनन अबू दावूद (4698), सुनन नसाई (4994), इब्ने माजा (64)

٩٨) حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللهِ بْنِ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ، حَدَّثَنَا أَبُو حَيَّانَ التَّيْمِيُّ، بِهَذَا الْإِسْنَادِ مِثْلَهُ، غَيْرَ أَنَّ فِي رِوَايَتِهِ: «إِذَا وَلَدَتِ الْأَمَةُ بَعْلَهَا» يَعْنِي السَّرَارِيَّ


98) (इब्ने उलय्या के बजाये) मुहम्मद बिन बशर ने कहा: हमें अबू हय्यान ने पिछली सनद से वही हदीस बयान की, लकिन उनकी रिवायत में: «إِذَا وَلَدَتِ الْأَمَةُ بَعْلَهَا» “जब लौंडी अपना मालिक जनेगीl”

तख़रीज : सही बुख़ारी (50), सुनन अबू दावूद (4698), सुनन नसाई (4994), इब्ने माजा (64)

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