Hadees in hindi

Monday, October 28, 2019

1 الطَّهَارَةِ عَنْ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ किताब : तहारत के अहकाम ओ मसाइल

بَابُ مَا جَاءَ أَنَّ مِفْتَاحَ الصَّلَاةِ الطُّهُورُ
बाब 3: वुज़ू नमाज़ की कुंजी है 

٣) حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، وَهَنَّادٌ، وَمَحْمُودُ بْنُ غَيْلَانَ، قَالُوا: حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ سُفْيَانَ، ح وحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ قَالَ: حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ قَالَ: حَدَّثَنَا [ص:9] سُفْيَانُ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَقِيلٍ، عَنْ مُحَمَّدِ ابْنِ الْحَنَفِيَّةِ، عَنْ عَلِيٍّ، عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، قَالَ: «مِفْتَاحُ الصَّلَاةِ الطُّهُورُ، وَتَحْرِيمُهَا التَّكْبِيرُ، وَتَحْلِيلُهَا التَّسْلِيمُ». هَذَا الْحَدِيثُ أَصَحُّ شَيْءٍ فِي هَذَا الْبَابِ وَأَحْسَنُ. وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ عَقِيلٍ هُوَ صَدُوقٌ، وَقَدْ تَكَلَّمَ فِيهِ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ قِبَلِ حِفْظِهِ. وسَمِعْت مُحَمَّدَ بْنَ إِسْمَاعِيلَ، يَقُولُ: كَانَ أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَالْحُمَيْدِيُّ، يَحْتَجُّونَ بِحَدِيثِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَقِيلٍ، قَالَ مُحَمَّدٌ: وَهُوَ مُقَارِبُ الْحَدِيثِ. وَفِي الْبَابِ عَنْ جَابِرٍ، وَأَبِي سَعِيدٍ


3) अली रज़ियल्लाहू अन्हु कहते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “नमाज़ की कुंजी वुज़ू है और उसकी तहरीम अल्लाहु अकबर कहना है (यानी अल्लाहु अकबर कह कर नमाज़ में दाख़िल होने से वह सारे काम हराम होते हैं जिन्हें अल्लाह ने नमाज़ में हराम किया है) और नमाज़ में जो चीज़ें हराम थीं, वह अस्सलामु अलैकुम (सलाम फेरने से) कहने ही से हलाल होती हैं l”
इमाम तिरमिज़ कहते हैं: इस बाब में यह हदीस सबसे सहीह और हसन है l अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद बिन अक़ील सुदूक़ हैं, बाज़ अहले इल्म ने उनके हाफ़िज़े के बारे में उन पर कलाम किया है, मैंने मुहम्मद बिन इस्माईल बुख़ारी को यह कहते हुए सुना कि अहमद बिन हम्बल, इसहाक़ बिन इब्राहीम और हुमैदी: अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद बिन अक़ील की रिवायत से हुज्जत पकड़ते थे और वह मक़ारबुल हदीस (इसका मतलब दूसरों की हदीस इसकी हदीस से क़रीब है) हैं l इस बाब में जाबिर और अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहू अन्हुमा से भी हदीसें आई हैं l
तहकीम :
ज़ुबैर अली ज़ई:- हसन
शेख़ अलबानी:- हसन सहीह  
शुऐब अरनऊत :- सहीह लिग़ेरिह
तख़रीज : सुनन अबू दावूद (61), इब्ने माजा (275)

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