بَابُ مَا جَاءَ لاَ تُقْبَلُ صَلاَةٌ بِغَيْرِ طُهُورٍ
बाब 1 :- वुज़ू (तहारत) के बिना नमाज़ क़ुबूल न होने का बयान
٢) حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ مُوسَى الْأَنْصَارِيُّ قَالَ: حَدَّثَنَا مَعْنُ بْنُ عِيسَى الْقَزَّازُ قَالَ: حَدَّثَنَا مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ، ح وحَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِذَا تَوَضَّأَ الْعَبْدُ الْمُسْلِمُ، أَوِ الْمُؤْمِنُ، فَغَسَلَ وَجْهَهُ خَرَجَتْ مِنْ وَجْهِهِ كُلُّ خَطِيئَةٍ نَظَرَ إِلَيْهَا بِعَيْنَيْهِ مَعَ الْمَاءِ - أَوْ مَعَ آخِرِ قَطْرِ الْمَاءِ، أَوْ نَحْوَ هَذَا - وَإِذَا غَسَلَ يَدَيْهِ خَرَجَتْ مِنْ يَدَيْهِ كُلُّ خَطِيئَةٍ بَطَشَتْهَا يَدَاهُ مَعَ الْمَاءِ - أَوْ مَعَ آخِرِ قَطْرِ الْمَاءِ - حَتَّى يَخْرُجَ نَقِيًّا مِنَ الذُّنُوبِ». هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَهُوَ حَدِيثُ مَالِكٍ، عَنْ سُهَيْلٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، وَأَبُو صَالِحٍ وَالِدُ سُهَيْلٍ هُوَ أَبُو صَالِحٍ السَّمَّانُ، وَاسْمُهُ ذَكْوَانُ، وَأَبُو هُرَيْرَةَ اخْتُلِفَ فِي اسْمِهِ، فَقَالُوا: عَبْدُ شَمْسٍ، وَقَالُوا: عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَمْرٍو، وَهَكَذَا قَالَ مُحَمَّدُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ، وَهَذَا الْأَصَحُّ. وَفِي الْبَابِ عَنْ عُثْمَانَ، وَثَوْبَانَ، وَالصُّنَابِحِيِّ، وَعَمْرِو بْنِ عَبَسَةَ، وَسَلْمَانَ، وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو، وَالصُّنَابِحِيُّ هَذَا الَّذِي رَوَى عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ، لَيْسَ لَهُ سَمَاعٌ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، وَاسْمُهُ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عُسَيْلَةَ، وَيُكْنَى أَبَا عَبْدِ اللَّهِ، رَحَلَ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُبِضَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ فِي الطَّرِيقِ، وَقَدْ رَوَى عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَحَادِيثَ، وَالصُّنَابِحُ بْنُ الْأَعْسَرِ الْأَحْمَسِيُّ صَاحِبُ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، يُقَالُ لَهُ: الصُّنَابِحِيُّ أَيْضًا، وَإِنَّمَا حَدِيثُهُ قَالَ: سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، يَقُولُ: إِنِّي مُكَاثِرٌ بِكُمُ الْأُمَمَ فَلَا تَقْتَتِلُنَّ بَعْدِي
2) अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु कहते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जब मुसलमान या मोमिन बन्दा वुज़ू करता है और अपना चेहरा धोता है तो पानी के साथ या पानी की आख़िरी बूंद के साथ उसके चेहरे से वह सारे गुनाह झड़ जाते हैं, जो उसकी आँखों ने किये थे या इसी तरह की कोई और बात फ़रमाई, फिर जब वह अपने हाथों को धोता है तो पानी के साथ या पानी की आख़िरी बूंद के साथ वह सारे गुनाह झड़ जाते हैं जो उसके हाथों से हुए हैं, और वह गुनाहों से पाक और साफ़ हो कर निकलता है l”इमाम तिरमिज़ी कहते हैं: यह हदीस हसन सहीह है l
यह हदीस मालिक की सुहेल से वो अपनी वालिद से वो अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु से और अबू सालेह (इस हदीस का रावी) जो सुहेल के वालिद हैं, अबू सालेह सम्मान है इनका नाम ज़कवान है और अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु के नाम में इख्तिलाफ है, वह कहते हैं इनका नाम अब्दुल शम्श है और वह कहते हैं इनका नाम अब्दुल्लाह बिन अम्र था, यही मुहम्मद बिन इस्माईल (बुख़ारी) कहते हैं और यही बात सबसे सही है l
इस बाब में उस्मान बिन अफ्फ़ान, सौबान, सुनाबिही, अम्र बिन अबसा, सलमान और अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहू अन्हुम से भी हदीसें आयीं हैं lसुनाबिही जिन्होंने अबू बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत की है, उनका समा रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम नहीं है, उनका नाम अब्दुर रहमान बिन उसैला और कुनियत अबू अब्दुल्लाह है l उनहोंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि के साथ सफ़र किया और रास्ते ही में थे कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि का इन्तिक़ाल हो गया, उन्होंने नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कई हदीसें रिवायत की हैं और सुनाबिहू बिन आसर अहमसी सहाबी ए रसूल हैं, उनको भी सुनाहिबी कहा जाता है, उन्हीं की हदीस है कि मैंने नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को फ़रमाते सुना: “मैं तुम्हारे ज़रिये से दूसरी उम्मतों में अपने ज़्यादा होने पर फ़ख्र करूंगा तो मेरे बाद तुम हरगिज़ एक दुसरे को क़त्ल ना करना l”
तख़रीज : सहीह मुस्लिम(577)
तख़रीज : सहीह मुस्लिम(577)
तहकीम :ज़ुबैर अली ज़ई:- सहीह
शेख़ अलबानी:- सहीह
शुऐब अरनऊत:- सहीह
शेख़ अलबानी:- सहीह
शुऐब अरनऊत:- सहीह
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