Hadees in hindi

Thursday, October 10, 2019

بَدْءِ الوَحْيِ वही की शुरुआत का बयान

كَيْفَ كَانَ بَدْءُ الوَحْيِ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ؟ وَقَوْلُ اللَّهِ جَلَّ ذِكْرُهُ: {إِنَّا أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ كَمَا أَوْحَيْنَا إِلَى نُوحٍ وَالنَّبِيِّينَ مِنْ بَعْدِهِ} [النساء: 163]

बाब 1: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर वही की शुरआत कैसे हुई? अल्लाह तआला के फ़रमान (की वज़ाहत) : "हमने आपकी तरफ़ उसी तरह वही नाज़िल फ़रमाई है जैसे हज़रत नूह अलैहिस्सलाम और उनके बाद आने वाले सारे नबियों की तरफ़ नाज़िल की थी"


٢) حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ، قَالَ: أَخْبَرَنَا مَالِكٌ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ المُؤْمِنِينَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا، أَنَّ الحَارِثَ بْنَ هِشَامٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ سَأَلَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ: يَا رَسُولَ اللَّهِ، كَيْفَ يَأْتِيكَ الوَحْيُ؟ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: أَحْيَانًا يَأْتِينِي مِثْلَ صَلْصَلَةِ الجَرَسِ، وَهُوَ أَشَدُّهُ عَلَيَّ، فَيُفْصَمُ عَنِّي وَقَدْ وَعَيْتُ عَنْهُ مَا قَالَ، وَأَحْيَانًا يَتَمَثَّلُ لِيَ المَلَكُ رَجُلًا فَيُكَلِّمُنِي فَأَعِي مَا يَقُولُ قَالَتْ عَائِشَةُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا: وَلَقَدْ رَأَيْتُهُ يَنْزِلُ عَلَيْهِ الوَحْيُ فِي اليَوْمِ الشَّدِيدِ البَرْدِ، فَيَفْصِمُ عَنْهُ وَإِنَّ جَبِينَهُ لَيَتَفَصَّدُ عَرَقًا


2) उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयशा रज़ियल्लाहू अन्हा से रिवायत है कि हज़रत हारिस बिन हिशाम रज़ियल्लाहू अन्हु ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा” ऐ अल्लाह के रसूल! आप पर वही कैसे आती है? तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “कभी तो वही आने की कैफ़ियत घंटी की टन टन की तरह होती है और यह कैफ़ियत मुझ पर बहुत सख़् गुज़रती, फ़िर जब फ़रिशते का पैग़ाम मुझे याद हो जाता है तो यह रुक जाती है और कभी फ़रिशता इंसानी शक्ल में मेरे पास आकर मुझसे बात करता और जो कुछ वह कहता है मैं उसे याद कर लेता हूँ l” हज़रत आयशा रज़ियल्लाहू अन्हा का बयान है: मैंने सख़्त सर्दी के दिनों में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को देखा कि जब वही आती तो उसके रुक जाने के बाद आपके माथे पर पसीना बह रहा होता l



तख़रीज : सहीह मुस्लिम (6058,6059), तिरमिज़ी (3634), नसाई (935)

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