باب بيان الإيمان والإسلام والإحسان ووجوب الإيمان بإثبات قدر الله سبحانه وتعالى وبيان الدليل على التبري ممن لا يؤمن بالقدر وإغلاظ القول في حقه
बाब 1: ईमान, इस्लाम, इहसान की वज़ाहत, तक़दीरे इलाही के अस्बात पर ईमान वाजिब है, तक़दीर पर ईमान न लाने वाले से बरात की दलील और उसके बारे में सख़्त मौक़िफ़
[٩٣] حَدَّثَنِي أَبُو خَيْثَمَةَ زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ كَهْمَسٍ، عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ بُرَيْدَةَ، عَنْ يَحْيَى بْنِ يَعْمَرَ، ح وحَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللهِ بْنُ مُعَاذٍ الْعَنْبَرِيُّ - وَهَذَا حَدِيثُهُ - حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا كَهْمَسٌ، عَنِ ابْنِ بُرَيْدَةَ، عَنْ يَحْيَى بْنِ يَعْمَرَ، قَالَ: كَانَ أَوَّلَ مَنْ قَالَ فِي الْقَدَرِ بِالْبَصْرَةِ مَعْبَدٌ الْجُهَنِيُّ، فَانْطَلَقْتُ أَنَا وَحُمَيْدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْحِمْيَرِيُّ حَاجَّيْنِ - أَوْ مُعْتَمِرَيْنِ - فَقُلْنَا: لَوْ لَقِينَا أَحَدًا مَنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، فَسَأَلْنَاهُ عَمَّا يَقُولُ هَؤُلَاءِ فِي الْقَدَرِ، فَوُفِّقَ لَنَا عَبْدُ اللهِ بْنُ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ دَاخِلًا الْمَسْجِدَ، فَاكْتَنَفْتُهُ أَنَا وَصَاحِبِي أَحَدُنَا عَنْ يَمِينِهِ، وَالْآخَرُ عَنْ شِمَالِهِ، فَظَنَنْتُ أَنَّ صَاحِبِي سَيَكِلُ الْكَلَامَ إِلَيَّ، فَقُلْتُ: أَبَا عَبْدِ الرَّحْمَنِ إِنَّهُ قَدْ ظَهَرَ قِبَلَنَا نَاسٌ يَقْرَءُونَ الْقُرْآنَ، وَيَتَقَفَّرُونَ الْعِلْمَ، وَذَكَرَ مِنْ شَأْنِهِمْ، وَأَنَّهُمْ يَزْعُمُونَ أَنْ لَا قَدَرَ، وَأَنَّ الْأَمْرَ أُنُفٌ، قَالَ: «فَإِذَا لَقِيتَ أُولَئِكَ فَأَخْبِرْهُمْ أَنِّي بَرِيءٌ مِنْهُمْ، وَأَنَّهُمْ بُرَآءُ مِنِّي»، وَالَّذِي يَحْلِفُ بِهِ عَبْدُ اللهِ بْنُ عُمَرَ «لَوْ أَنَّ لِأَحَدِهِمْ مِثْلَ أُحُدٍ ذَهَبًا، فَأَنْفَقَهُ مَا قَبِلَ اللهُ مِنْهُ حَتَّى يُؤْمِنَ بِالْقَدَرِ» ثُمَّ قَالَ: حَدَّثَنِي أَبِي عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ قَالَ: بَيْنَمَا نَحْنُ عِنْدَ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَاتَ يَوْمٍ، إِذْ طَلَعَ عَلَيْنَا رَجُلٌ شَدِيدُ بَيَاضِ الثِّيَابِ، شَدِيدُ سَوَادِ الشَّعَرِ، لَا يُرَى عَلَيْهِ أَثَرُ السَّفَرِ، وَلَا يَعْرِفُهُ مِنَّا أَحَدٌ، حَتَّى جَلَسَ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، فَأَسْنَدَ رُكْبَتَيْهِ إِلَى رُكْبَتَيْهِ، وَوَضَعَ كَفَّيْهِ عَلَى فَخِذَيْهِ، وَقَالَ: يَا مُحَمَّدُ أَخْبِرْنِي عَنِ الْإِسْلَامِ، فَقَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «الْإِسْلَامُ أَنْ تَشْهَدَ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، وَتُقِيمَ الصَّلَاةَ، وَتُؤْتِيَ الزَّكَاةَ، وَتَصُومَ رَمَضَانَ، وَتَحُجَّ الْبَيْتَ إِنِ اسْتَطَعْتَ إِلَيْهِ سَبِيلًا»، قَالَ: صَدَقْتَ، قَالَ: فَعَجِبْنَا لَهُ يَسْأَلُهُ، وَيُصَدِّقُهُ، قَالَ: فَأَخْبِرْنِي عَنِ الْإِيمَانِ، قَالَ: «أَنْ تُؤْمِنَ بِاللهِ، وَمَلَائِكَتِهِ، وَكُتُبِهِ، وَرُسُلِهِ، وَالْيَوْمِ الْآخِرِ، وَتُؤْمِنَ بِالْقَدَرِ خَيْرِهِ وَشَرِّهِ»، قَالَ: صَدَقْتَ، قَالَ: فَأَخْبِرْنِي عَنِ الْإِحْسَانِ، قَالَ: «أَنْ تَعْبُدَ اللهَ كَأَنَّكَ تَرَاهُ، فَإِنْ لَمْ تَكُنْ تَرَاهُ فَإِنَّهُ يَرَاكَ»، قَالَ: فَأَخْبِرْنِي عَنِ السَّاعَةِ، قَالَ: «مَا الْمَسْئُولُ عَنْهَا بِأَعْلَمَ مِنَ السَّائِلِ» قَالَ: فَأَخْبِرْنِي عَنْ أَمَارَتِهَا، قَالَ: «أَنْ تَلِدَ الْأَمَةُ رَبَّتَهَا، وَأَنْ تَرَى الْحُفَاةَ الْعُرَاةَ الْعَالَةَ رِعَاءَ الشَّاءِ يَتَطَاوَلُونَ فِي الْبُنْيَانِ»، قَالَ: ثُمَّ انْطَلَقَ فَلَبِثْتُ مَلِيًّا، ثُمَّ قَالَ لِي: «يَا عُمَرُ أَتَدْرِي مَنِ السَّائِلُ؟» قُلْتُ: اللهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ، قَالَ: «فَإِنَّهُ جِبْرِيلُ أَتَاكُمْ يُعَلِّمُكُمْ دِينَكُمْ»
93) इब्ने बुरैदा ने यहया बिन यामर से रिवायत की,
उन्होंने कहा कि सबसे पहला शख़्स जिसने बसरा में तक़दीर (से इन्कार) की बात की, मअबद
जुहनी था l मैं (यहया) और हुमैद बिन अब्दुर रहमान हिमयरी हज या उमरे कि इरादे से
निकले, हमने (आपस में) कहा: काश! रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि के सहाबा में से
किसी के साथ हमारी मुलाक़ात हो जाये तो हम उनसे तक़दीर के बारे में इन (आजकल के)
लोगो की कही हुई बातों के बारे में पूँछ लें l अल्लाह की तौफीक़ से हमें हज़रत अब्दुल्लाह
बिन उमर बिन ख़त्ताब रज़ियल्लाहू अन्हुमा मस्जिद में जाते हुए मिल गये l मैं और मेरे
साथी ने उनको अपने बीच में ले लिया, एक उनकी दायीं तरफ़ था और दूसरा उनकी बायीं तरफ़
l मुझे अंदाजा था कि मेरा साथी बात करने (का मामला) मेरे ही सुपुर्द करेगा, तो
मैंने पूछा: ऐ अबू अब्दुर रहमान! (यह अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहू अन्हुमा की
कुनियत है) बात यह है कि हमारी तरफ़ कुछ ऐसे लोग आये हैं जो क़ुरआन मजीद पढ़ते हैं और
इल्म सीखते हैं (और उनके हालात बयान किये) उन लोगो का ख़याल है कि तक़दीर कुछ नहीं,
(हर) काम नए सिरे से हो रहा है (पहले इस बारे में न कुछ तय है, न अल्लाह को इसका
इल्म है) इब्ने उमर रज़ियल्लाहू अन्हुमा ने फ़रमाया: जब तुम्हारी उन लोगो से मुलाक़ात
हो तो उन्हें बता देना कि मैं उनसे बरी हूँ और वह मुझसे बरी हैं l उस (ज़ात) की क़सम
जिस (के नाम) के साथ अब्दुल्लाह बिन उमर हलफ़ उठाता है! अगर उनमें से किसी के पास
उहुद पहाड़ के बराबर सोना हो और वह उसे ख़र्च (भी) कर दे तो अल्लाह तआला उसकी तरफ़ से
उसको क़ुबूल नहीं फ़रमायेगा जब तक कि वह तक़दीर पर ईमान ले आये, फिर कहा: मुझे मेरे
वालिद हज़रत उमर बिन ख़त्ताब रज़ियल्लाहू अन्हु ने बताया: एक दिन हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु
अलैहि वसल्लम के पास हाज़िर थे कि अचानक एक शख़्स हमारे सामने आया l उसके कपड़े बहुत
ज़्यादा सफ़ेद और बाल बहुत ज़्यादा काले थे l उसपर सफ़र का कोई असर दिखाई नहीं देता न
हममें से कोई उसे पहचानता था, वह आकर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास बैठ
गया और अपने घुटने आपके घुटनों से मिला दिए, और अपने हाथ आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
की रानों पर रख दिए और कहा: ऐ मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)! मुझे इस्लाम के
बारे में बताइए l रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “इस्लाम यह है कि
तुम इस बात की गवाही दो कि अल्लाह तआला के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं और मुहम्मद
सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उसके रसूल हैं, नमाज़ पाबन्दी से पढ़ो, ज़कात अदा करो, रमज़ान
के रोज़े रखो और अगर अल्लाह के घर तक रास्ता (तय करने) की ताक़त हो तो उसका हज करो l”
उसने कहा: आपने सच फ़रमाया l (हज़रत उमर रज़ियल्लाहू ने) कहा: हमें इस पर हैरानी हुई
कि आपसे पूछता है और (ख़ुद ही) आपकी तस्दीक़ करता है l उसने कहा: मुझे ईमान के बारे
में बताइए l आपने फ़रमाया: “यह कि तुम अल्लाह तआला, उसके फ़रिशतों, उसकी किताबों,
उसके रसूलों और आख़िरी दिन (क़यामत के दिन) पर ईमान रखो और अच्छी और बुरी तक़दीर पर
भी ईमान लाओ l” उसने कहा: आपने दुरुस्त फ़रमाया l (फिर) उसने कहा: मुझे इहसान के
बारे में बताइए l आपने फ़रमाया: “यह कि तुम अल्लाह तआला की इबादत इस तरह करो जैसे
तुम उसे देख रहे हो और अगर तुम उसे नहीं देख रहे हो तो वह तुम्हें देख रहा है l”
उसने कहा: तो मुझे क़यामत के बारे में बताइए l आपने फ़रमाया: “जिससे इस (क़यामत) के
बारे में सवाल किया जा रहा है, वह पूछने वाले से ज़्यादा नहीं जानता l” उसने कहा:
तो मुझे इसकी निशानियाँ बता दीजिये l आपने फ़रमाया: “(निशानियाँ यह हैं कि) लौंडी
अपनी मालिका को जन्म दे और यह कि तुम नंगे पांव, नंगे बदन, मोहताज, बकरियां चराने
वालों को देखो कि वह ऊंची से ऊंची इमारतें बनाने में एक दुसरे के साथ मुक़ाबला कर
रहे हैं l” हज़रत उमर रज़ियल्लाहू अन्हु ने कहा: फिर वह पूछने वाला चला गया, मैंने
कुछ देर इसी तरह रहा, फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुझ से कहा: “ऐ उमर!
तुम्हें मालूम है कि पूछने वाला कौन था?” मैंने कहा: अल्लाह और उसका रसूल ज़्यादा
जानता हैं l आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “वह जिब्रील अलैहिस्सलाम थे,
तुम्हारे पास आये थे, तुम्हें तुम्हारा दीन सिखा रहे थे l”
तख़रीज : सुनन अबू दावूद (4695), सुनन इब्ने माजा (63)
तख़रीज : सुनन अबू दावूद (4695), सुनन इब्ने माजा (63)
तख़रीज : सुनन अबू दावूद (4695), सुनन इब्ने माजा (63)
[٩٤] حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ الْغُبَرِيُّ، وَأَبُو كَامِلٍ الْجَحْدَرِيُّ، وَأَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ قَالُوا: حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ مَطَرٍ الْوَرَّاقِ، عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ بُرَيْدَةَ، عَنْ يَحْيَى بْنِ يَعْمَرَ، قَالَ: لَمَّا تَكَلَّمَ مَعْبَدٌ بِمَا تَكَلَّمَ بِهِ فِي شَأْنِ الْقَدَرِ أَنْكَرْنَا ذَلِكَ، قَالَ: فَحَجَجْتُ أَنَا وَحُمَيْدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْحِمْيَرِيُّ حَجَّةً، وَسَاقُوا الْحَدِيثَ بِمَعْنَى حَدِيثِ كَهْمَسٍ وَإِسْنَادِهِ، وَفِيهِ بَعْضُ زِيَادَةٍ وَنُقْصَانُ أَحْرُفٍ
94) कहमस के
बजाये मतर वर्राक़ ने अब्दुल्लाह बिन बुरैदा से, उन्होंने यहया बिन यामर से नक़ल
किया कि जब माबद ने तक़दीर के बारे में वह (सब) कहा जो कहा, तो हमने उसे बहुत बुरा
जाना (यहया ने कहा) मैंने और हुमैद बिन अब्दुर रहमान हिमयरी ने हज किया...... इसके
बाद उन्होंने कहमस के वास्ते से बयान की हुई हदीस के मुताबिक़ हदीस बयान की, अलबत्ता अलफ़ाज़
में कुछ कमी बेशी है l
तख़रीज : सुनन अबू दावूद (4695), सुनन इब्ने माजा (63)
तख़रीज : सुनन अबू दावूद (4695), सुनन इब्ने माजा (63)
[٩٥] وحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ، حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ غِيَاثٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللهِ بْنُ بُرَيْدَةَ، عَنْ يَحْيَى بْنِ يَعْمَرَ، وَحُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ قَالَا: لَقِينَا عَبْدَ اللهِ بْنَ عُمَرَ، فَذَكَرْنَا الْقَدَرَ، وَمَا يَقُولُونَ فِيهِ، فَاقْتَصَّ الْحَدِيثَ كَنَحْوِ حَدِيثِهِمْ، عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللهُ عَنْهُ، عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، وَفِيهِ شَيْءٌ مِنْ زِيَادَةٍ وَقَدْ نَقَصَ مِنْهُ شَيْئًا
95) (अब्दुल्लाह
बिन बुरैदा के एक तीसरे शागिर्द) उस्मान बिन ग़ियास ने यहया बिन यामर और हुमैद बिन
अब्दुर रहमान दोनों से रिवायत की, दोनों ने कहा: हम अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहू
अन्हुमा से मिले और हमने तक़दीर की बात की और वह लोग जो कुछ कहते हैं, उसका ज़िक्र
किया l इसके बाद (उस्मान बिन ग़ियास ने) पहले रावियों के मुताबिक़ हज़रत उमर रज़ियल्लाहू
अन्हु से मरफ़ूअन रिवायत की l इस रिवायत में कुछ अलफ़ाज़ ज़्यादा हैं और कुछ उन्होंने
कम किये हैं l
तख़रीज : सुनन अबू दावूद (4695), सुनन इब्ने माजा (63)
[٩٦] وحَدَّثَنِي حَجَّاجُ بْنُ الشَّاعِرِ، حَدَّثَنَا يُونُسُ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا الْمُعْتَمِرُ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ يَحْيَى بْنِ يَعْمَرَ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنْ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِنَحْوِ حَدِيثِهِمْ
96) मुअतमिर के
वालिद (सुलेमान बिन तरख़ान) ने यहया बिन यामर से, उन्होंने अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहू
अन्हुमा से, उन्होंने हज़रत उमर रज़ियल्लाहू अन्हु से और उन्होंने नबी सल्लल्लाहु
अलैहि वसल्लम से इसी तरह रिवायत की जिस तरह इससे पहले ज़िक्र किये हुए उस्तादों ने
रिवायत की l
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