Hadees in hindi

Monday, October 14, 2019

1 كتاب السنة सुन्नत की अहमियत और फ़ज़ीलत

بَابُ اتِّبَاعِ سُنَّةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

बाब 1 :- सुन्नते रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पैरवी का बयान

٢) حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ، قَالَ: أَخْبَرَنَا جَرِيرٌ، عَنِ الْأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: ذَرُونِي مَا تَرَكْتُكُمْ، فَإِنَّمَا هَلَكَ مَنْ كَانَ قَبْلَكُمْ بِسُؤَالِهِمْ وَاخْتِلَافِهِمْ عَلَى أَنْبِيَائِهِمْ، فَإِذَا أَمَرْتُكُمْ بِشَيْءٍ فَخُذُوا مِنْهُ مَا اسْتَطَعْتُمْ، وَإِذَا نَهَيْتُكُمْ عَنْ شَيْءٍ فَانْتَهُوا

2) हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जब तक मैं तुम्हें (किसी मामले में आज़ाद) छोड़े रखूँ, तब तक तुम भी मुझे छोड़े रखो (बिना ज़रुरत सवाल न करो) क्यूंकि तुमसे पहले लोग अपने नबियों से सवालात करने और (फिर) उनके (अहकाम) की मुख़ालिफ़त करने की वजह से हलाक हुए, लिहाज़ा जब में तुम्हें किसी काम का हुक्म दूं तो अपनी हिम्मत के मुताबिक़ इसको करो और जब किसी काम से मना कर दूं तो इससे रुक जाओ l”

तख़रीज : सही बुख़ारी (7288), सही मुस्लिम (3257), तिरमिज़ी (2679)

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